जापान की राजधानी तोक्यो में क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद संयुक्त घोषणा पत्र में लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और उनके छद्म संगठनों सहित संयुक्त राष्ट्र द्वारा सुचीबद्ध सभी आतंकी समूह के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने का आह्वान किया गया है। क्वाड ने परोक्ष रूप से पाकिस्तान के संदर्भ देते हुए सभी देशों से आग्रह किया कि वे अपना क्षेत्र का आतंकी उद्देश्य के लिए इस्तेमाल होने से रोकने के लिए ठोस कार्रवाई करें। घोषणा पत्र में सीमा पार आतंकवाद सहित आतंकवाद के सभी प्रारूपों की स्पष्ट रूप से निंदा की गई। मालूम हो कि क्वाड की बैठक में चारों देशों भारत, जापान, अमरीका एवं ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों ने हिस्सा लिया। भारत की तरफ से विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हिस्सा लिया। आतंकवादी संगठनों द्वारा मानव रहित हवाई यान, ड्रोन, सुरगों और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकियों की इस्तेमाल की निंदा की गई है। क्वाड ने सभी देशों से आग्रह किया है वे अपने नियंत्रित वाले क्षेत्र का आतंकवादी उद्देश्य के लिए इस्तेमाल होने से रोकने के लिया तत्काल कदम उठाए। बैठक का दूसरे प्रमुख मुद्दा हिंद प्रशांत क्षेत्र में दादागिरी बंद करने का था। क्वार्ड के देशों ने परोक्ष रूप से चीन को संदेश देना का प्रयास किया कि वे हिंद प्रशांत क्षेत्र में एक तरफा कार्रवाई करने से बाज आए। मालूम हो कि चीन अपने सभी पड़ोसी देशों के साथ तनाव पैदा कर उनके क्षेत्र को हथियाने की लगातार साजिश रचता रहता है। फिलिपींस के साथ चीन का लगातार टकराव चल रहा है। ताइवान के साथ भी ऐसी ही स्थिति है। चीन की सेना लगातार ताइवान के क्षेत्र में घुसपैठ कर डराने-धमकाने का काम करती है। भारत के साथ भी चीन का सीमा विवाद काफी लंबे समय चल रहा है। गलवान घाटी हिंसक टकवार के साथ पिछले चार वर्षों से भारत-चीन सीमा पर दोनों देशों के जवान आमने-सामने खड़े हैं। दोनों देशों की तरफ से आधुनिक हथियार एवं मिसाइल तैनात किए गए है। हिंद प्रशांत क्षेत्र के अधिकांश हिस्से को चीन अपना बताता है, जबकि अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार पड़ोसी देशों का भी उस पर अधिकार होना चाहिए। चीन की बढ़ती दादागिरी को देखते हुए क्वाड की स्थापना की गई है। चीन भारत को घेरने के लिए पड़ोसी देशों को कर्ज जाल में फंसाकर भारत के खिलाफ माहौल तैयार करने के लिए लगातार कोशिश में है। अब भारत भी चीन की भाषा में जवाब देते हुए फिलिपींस, वियतनाम, ताइवान एवं जापान जैसे देशों के साथ आर्थिक और सामरिक सहयोग बढ़ा रहा है। भारत ने फिलिपींस को ब्रह्मोस जैसे क्रूज मिसाइल दी है जो रडार के पहुंच से बाहर है। अमरीका चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए हिंद प्रशांत क्षेत्र में क्वाड का गठन करवाया है। इसमें और देशों को शामिल करने की पहल हो रही हैं। हालांकि अभी तक क्वाड असामरिक संगठन है, किंतु अमरीका चाहता है कि क्वाड को सैनिक गठबंधन के रूप में तब्दील कर दिया जाए। चीन एक तरफ भारत के साथ संबंध सुधारने का दावा कर रहा है तो दूसरी तरफ पूर्वी लद्दाख में पैगोंग त्सो पर पुल बनाने के बाद डेमचोक इलाके पर भी अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। डेमचोक सेक्टर में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने एक नया गांव बसाना शुरू किया है। एलएसी से 17 किलोमीटर दूर स्थित डेमचोक सामरिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण जगह है। क्वाड की बैठक से चीन को मिर्ची लगना स्वाभाविक है। चीन के विदेश मंत्रालय ने क्वाड की बैठक पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि यह संगठन अन्य देशों का विकाश रोकने के लिए कृत्रिम रूप तनाव पैदा कर रहा है। कुल मिलाकर देखा जाए तो क्वाड की बैठक का मुख्य फोकस चीन और पाकिस्तान पर ही है।
क्वाड की अपील
