भारतीय संस्कृति के सनातन धर्म में भगवान शिवजी की महिमा अनन्त है। इनके शिवालय सर्वत्र प्रतिष्ठिïत हैं, जिनके दर्शनमात्र से अलौकिक शान्ति की प्राप्ति होती है। सर्वप्रिय मनभावन श्रावण मास का शुभारंभ 22 जुलाई, सोमवार से हो रहा है। इस बार श्रावण मास सोमवार से शुरू होकर सोमवार को ही समाप्त हो रहा है, जो कि अपने आप में एक अनूठा संयोग है। यह संयोग कई वर्षों बाद बना है। यह माह भगवान आशुतोष को समर्पित है। प्रख्यात ज्योतिषविद् विमल जैन ने बताया कि धर्मशास्त्रों के अनुसार तैंतीस कोटि देवी-देवताओं में भगवान् शिव ही देवाधिदेव महादेव की उपमा से अलंकृत है।
ब्रह्मा, विष्णु, महेश—त्रिमूर्ति में शिव सम्पूर्ण सृष्टि के पालनहार एवं मृत्यु हरने वाले देवता माने गए हैं। जिनके दर्शन, पूजन, अर्चना एवं व्रत से जीवन में अभीष्ट की प्राप्ति होती है तथा सर्वसंकटों का निवारण होता है। भगवान शिवजी की अर्चना के लिए श्रावण मास अतिविशिष्ट माना गया है। शिवजी की महिमा में मास के सभी सोमवार तथा त्रयोदशी एवं चतुर्दशी तिथि के दिन व्रत उपवास रखकर पूजा-अर्चना करनी चाहिए। श्रावण मास में भगवान शिवजी का रुद्राभिषेक करके समस्त सुखों की प्राप्ति की जा सकती है।
शिवपूजा से भक्तों के समस्त कष्ट एवं अकाल मृत्यु के भय का निवारण होता है। श्रावण मास में कांवड़ चढ़ाने की परम्परा है। विमल जैन के अनुसार भगवान शिवजी विशिष्ट कामनाओं को शीघ्र पूर्ति करते हैं। शिवभक्ति की कामना के लिए गंगाजल से अभिषेक करना चाहिए। आरोग्य सुख एवं व्याधियों की निवृत्ति के लिए श्रीमहामृत्युंजय मंत्र का जप करना चाहिए। आर्थिक समृद्धि के लिए, दारिद्र्यदहन शिवस्तोत्र का पाठ साथ ही शिवजी का गन्ने के रस से अभिषेक करना चाहिए। कुंवारी कन्याओं को उत्तम वर की प्राप्ति के लिए श्रावण मास में प्रत्येक सोमवार का व्रत रखना चाहिए। संतान सुख के लिए शिवजी का दूध से अभिषेक करना चाहिए। सोमवार, प्रदोष एवं शिव चतुर्दशी व्रत रखना विशेष फलदाई रहता है। जिन जातकों की कुण्डली में कालसर्प योग हो, उन्हें नाग पंचमी के दिन शिवपूजा करके नाग-नागिन का जोड़ा शिवलिंग पर अर्पित करना चाहिए। मो. : 09335414722