लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश विधानसभा के 10 सदस्यों के सांसद बन जाने के बाद अब वहां के इन 10 सीटों पर उपचुनाव होने हैं। अब यह चुनाव भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती है। लोकसभा चुनाव में 80 सीटों में से केवल 33 सीटों पर जीत दर्ज करने वाली भाजपा को उपचुनाव में बड़ी जीत दर्ज कर अपनी शानदार उपस्थिति दर्ज करने की जरुरत है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए उपचुनाव होने वाली सभी सीटों पर जीत दर्ज करना प्रतिष्ठा का प्रश्न बना हुआ है। लोकसभा चुनाव में शिकस्त के बाद उत्तर प्रदेश में भाजपा की हार की समीक्षा के लिए लगातार बैठकें हो रही हंै। पार्टी के अंदर भी टिकट के बंटवारे को लेकर असंतोष उभर कर सामने आया है। सरकार और संगठन के बीच खींचतान की खबरें भी आ रही हैं। उत्तर प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष भूपेन्द्र चौधरी तथा उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने नई दिल्ली में भाजपा के शीर्ष नेताओं के साथ बैठक कर अपने विचार साझा किये हैं। भूपेन्द्र चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं गृह मंत्री अमित शाह के साथ मुलाकात की है, जबकि मौर्य ने राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा एवं मंत्री अमित शाह से भेंट की है। भूपेन्द्र चौधरी ने हार की नैतिक जिम्मेवारी लेते हुए इस्तीफे की पेशकश भी की है, किंतु पार्टी नेतृत्व ने अगले दो महीने तक इस पद पर बने रहने को कहा है। केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है कि संगठन सरकार से बड़ा होता है। मौर्य का यह बयान यह बताने के लिए काफी है कि उत्तर प्रदेश में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। इधर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 10 विधानसभा के उपचुनाव के लिए कमर कस ली है। बुधवार को उन्होंने सभी संबद्ध 30 मंत्रियों के साथ बैठक कर उनके लिए कार्यसूची तय कर दी है। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के लिए औसतन तीन मंत्रियों को जीत सुनिश्चित करने का दायित्व सौंपा गया है। इन मंत्रियों को सप्ताह में कम से कम दो दिन संबंधित चुनाव क्षेत्रों में रात्रि विश्राम कर वहां की स्थिति की जानकारी लेना होगा। बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं से संवाद कर उनकी समस्याओं का समाधान करना, सीट बंटवारे के बारे में चर्चा कर अपनी राय देना, अच्छे उम्मीदवार की सलाह देना आदि शामिल हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मुख्यमंत्री द्वारा बुलाई गई बैठक में दोनों उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य एवं ब्रजेश पाठक गायब रहे। मुख्यमंत्री ने इसी बीच उत्तर प्रदेश के राज्यपाल आनंदी बेन पटेल से भेंट की। मुख्यमंत्री की इस पहल के बाद मंत्रिमंडल में फेरबदल की संभावना बढ़ गई है। कुल मिलाकर पिछले कुछ दिनों से उत्तर प्रदेश में भाजपा की गतिविधियों में काफी तेजी आई है। जिन 10 विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव होने वाले हैं इसमें अयोध्या की मिल्कीपुर तथा करहल क्षेत्र भी शामिल है। मिल्कीपुर से सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अवधेश प्रसाद तथा करहल से अखिलेश यादव विधायक थे। भाजपा इन दोनों सीटों पर जीत के लिए फोकस कर रही है। बाकी आठ सीटें क्रमशः कटेहरी, सीसामऊ, फुलपुर, मझवां, गाजियाबाद सदर, मीरापुर, खैर तथा कुंदरकी हैं। इन दस में से पांच सीटों पर समाजवादी पार्टी तथा पांच पर एनडीए का कब्जा था। पांच में से तीन सीट पर भाजपा के विधायक थे। कुल मिलाकर उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव मोदी और योगी के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बना हुआ है। वर्ष 2027 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव होने हैं। इससे पहले भाजपा अपनी पुरानी गलतियों को सुधार कर अपनी जड़ मजबूत करना चाहती है। राजस्थान के उपचुनाव में भी जीत सुनिश्चित करने के लिए भाजपा एक्शन में है। यहां भी पार्टी को लोकसभा चुनाव में अपेक्षित सीटें नहीं मिली थी। उपचुनाव को भाजपा सेमिफाइनल की तरह मानकर चुनावी मैदान में उतरना चाहती है।
यूपी उपचुनाव में भाजपा की अग्नि-परीक्षा
