लोकसभा चुनाव के एक महीने बाद देश के सात राज्यों के 13 विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव हुए जिसमें भाजपा को करारा झटका लगा है। कुल 13 सीटों में से 10 सीटों पर इंडी गठबंधन को जीत मिली है, जबकि केवल दो सीटों पर जीत के साथ भाजपा को संतोष करना पड़ा है। बिहार की एकमात्र सीट निर्दलीय के खाते में गई है। उपचुनाव में भाजपा को जिन दो सीटों पर विजय मिली है उसमें भी जीत का अंतर बहुत कम रहा है। यह चुनाव परिणाम भाजपा के लिए चिंता का विषय है, जिस पर मंथन करने की जरुरत है। पश्चिम बंगाल की सभी चार विधानसभा सीटों पर सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस ने कब्जा कर लिया है। मध्यप्रदेश की एकमात्र सीट पर हुए चुनाव में भाजपा ने जीत जरूर हासिल की, किंतु जीत का अंतर केवल तीन हजार ही रहा। हिमाचल प्रदेश की हमीदपुर सीट को भाजपा ने दो हजार से कम मत से विजय हासिल की है, जबकि वहां की बाकी दो सीटों पर कांग्रेस ने परचम लहराया है। उत्तराखंड के दोनों विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा को शिकस्त मिली है। इसी तरह पंजाब में आम आदमी पार्टी, तमिलनाडु में डीएमके ने परचम फहराया है, जबकि बिहार की रूपौली सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार ने सत्ताधारी जद-यू तथा मुख्य विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल को शिकस्त देकर यह दिखा दिया है कि उम्मीदवार की लोकप्रियता भी चुनाव में मायने रखती है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस का दबदबा लोकसभा चुनाव की तरह जारी रहा। अब अगले तीन-चार महीने में महाराष्ट्र में चुनाव होना है। अगर लोकसभा चुनाव की तरह महाराष्ट्र में भी विपक्षी गठबंधन को मतदाताओं का समर्थन जारी रहा तो वर्तमान सरकार का जाना तय है। उपचुनाव को लेकर इंडी गठबंधन पूरे जोश में है, किंतु यह सबको मालूम है कि इंडी गठबंधन में भी सब कुछ ठीक-ठाक नहीं है। आम आदमी पार्टी ने पहले ही घोषणा कर दी है कि कांग्रेस के साथ उनका गठबंधन केवल लोकसभा चुनाव तक ही सीमित था। ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने तो लोकसभा चुनाव में ही कांग्रेस को धत्ता बता दिया था। आगे उत्तर प्रदेश के खाली 10 विधानसभा सीटों सहित राजस्थान एवं देश के अन्य राज्यों की विधानसभा सीटों पर चुनाव होना है। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित है। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा गठबंधन को कुल 36 सीटें मिली हैं जिसमें भाजपा के खाते में 33 सीटें हैं। समाजवादी पार्टी को कुल 37 सीटें खाते में आई है, जबकि सहयोगी कांग्रेस ने छह सीटों पर परचम लहराया है। भाजपा चाहती है कि 10 सीटों के लिए होने वाले उपचुनाव में सभी सीटों पर जीत दर्ज की जाए। भाजपा ने अभी से ही आगामी विधानसभा चुनाव के लिए तैयारी भी शुरू कर दी है। उत्तर प्रदेश और राजस्थान में भाजपा को बड़ी जीत की जरुरत है ताकि वह उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में कार्यकर्ताओं को बड़ा संदेश दे सके। इससे भाजपा को विपक्षी दलों पर बढ़त का भी मौका मिलेगा।