हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को भड़ल्या नवमी मनाई जाती है। इस बार भड़ल्या नवमी 15 जुलाई, सोमवार को मनाई जाएगी। शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 14 जुलाई को शाम 5 बजकर 26 मिनट पर शुरू होगी, वहीं समापन 15 जुलाई को शाम सात बजकर 19 मिनट पर होगा। इस समय में अपने इष्टदेव की पूजा कर कोई भी शुभ कार्य कर सकते हैं। भड़ल्या नवमी को भड़रिया नौमी, भड़ल्या नवमी, भढली नवमी, भड़ली नवमी, भादरिया नवमी, भदरिया नवमी, कन्दर्प नवमी एवं बदरिया नवमी आदि नाम से भी जाना जाता है। इसी दिन आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि की नवमी तिथि भी है। भड़ली नवमी में अबूझ मुहूर्त होता है। इस तिथि को बगैर पंचांग को देखे विवाह से लेकर कोई मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं। इस बार नवमी के दिन कई शुभ योग बन रहे हैं। इसलिए इसका महत्व बढ़ जाता है। 

भड़ल्या नवमी का धार्मिक महत्व  : भड़ल्या नवमी तिथि को अबूझ मुहूर्त माना जाता है और यह तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है। मान्यता है कि जिन लोगों का विवाह का मुहूर्त नहीं निकलता, उनका विवाह इस तिथि में किया जाता सकता है। इस तिथि को किया गया विवाह हर तरह से सुख-सौभाग्य प्रदान करने वाला होता है और जीवन में किसी तरह की परेशानी नहीं होती। देवशयनी एकादशी को भगवान विष्णु क्षीर सागर में शयन के लिए चले जाते हैं, उससे पहले केवल इस तिथि को ही शुभ व मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं। देवशयनी एकादशी से चातुर्मास प्रारंभ हो जाता है, उसके बाद चार महीनों के लिए सभी शुभ कार्य रुक जाते हैं। नवमी तिथि को भगवान विष्णु की पूजा अर्चना और हवन करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है और जीवन में कभी भी धन धान्य की कमी नहीं होती है। इस दिन खरीदारी और नए कार्य की शुरुआत करने से मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है और घर में सुख शांति और समृद्धि का आगमन होता है।