प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी तीन दिवसीय विदेश यात्रा के पहले चरण में 8 जुलाई को रूस में थे। 9 जुलाई की शाम मोदी रूस की यात्रा पूरी कर आस्टि्रया पहुंच चुके हैं। रूस की राजधानी मास्को पहुंचने पर मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। रूस के प्रथम उप-प्रधानमंत्री ने हवाई अड्डे पर मोदी की अगवानी की तथा वे होटल तक उनके साथ गए। भारत और रूस की दोस्ती हर कठिन चुनौती में मजबूती से उभर कर सामने आई है। जब भारत को जरुरत थी उस वक्त तत्कालीन सोवियत संघ ने दुनिया की परवाह किये बिना भारत का साथ दिया। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद अमरीका सहित पश्चिमी देशों ने रूस पर प्रतिबंधों की झड़ी लगा दी, उस वक्त भारत ने रूस का साथ नहीं छोड़ा। यही कारण है कि इस दरम्यान रूस की आर्थिक स्थिति डगमगाने से बच गई। भारत ने पश्चिमी देशों की परवाह किये बिना रूस से सस्ते दर पर कच्चे तेल की खरीद की जिससे हमारे देश की ईंधन की जरुरतों को पूरा किया गया। दोनों नेताओं की साझा बैठक के दौरान मोदी ने इस चीज का उल्लेख किया। मोदी की रूस यात्रा पर अमरीका सहित पश्चिमी देशों की नजर थी। पुतिन ने भी मोदी की आवभगत में कोई कसर नहीं छोड़ी। रूसी राष्ट्रपति ने अपने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ द सेंट एंड्रयू’ से प्रधानमंत्री मोदी को सम्मानित किया। दोनों देशों के नेताओं की बैठक के दौरान आतंकवाद तथा यूक्रेन युद्ध के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई। भारत यूक्रेन युद्ध को बंद करवाने के लिए अपनी तरफ से मध्यस्थता करने को तैयार है। रूसी राष्ट्रपति ने भी अपने संबोधन में इस बात का जिक्र किया है। आतंकवाद के मुद्दे पर दोनों देश मिलकर काम करने पर सहमत हुए है, क्योंकि दोनों ही देश आतंकवाद से पीड़ित हैं। रूस के साथ व्यापार को बढ़ावा देने के लिए भारत ने कजान एवं येकातेरिनबर्ग में वाणिज्य दूतावास खोलने की घोषणा की है। मोदी ने दोनों देशों के बीच होने वाले 22वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन को भी संबोधित किया। बातचीत के दौरान सेमी कंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन, वैश्विक गरीबी, जलवायु परिवर्तन एवं स्टार्टअप ईको सिस्टम जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। मोदी ने पुतिन से स्पष्ट रूप से कहा कि बम, बंदूक तथा गोली से समस्या का हल नहीं हो सकता। इसके अलावे दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय बैठक के दौरान भारत को आपूर्ति होने वाले एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम, परमाणु इकाई स्थापित करने तथा सैन्य साजोसामान के बारे में महत्वपूर्ण चर्चा हुई। हालांकि अभी तक इस बारे में कोई खुलासा नहीं हुआ है। अमरीका सहित पश्चिमी देश चाहते हैं कि भारत रूस-यूक्रेन युद्ध रुकवाने में अपने प्रभाव का इस्तेमाल करे। यह तभी संभव है जब दोनों पक्ष ईमानदारी से शांति के लिए आगे बढ़े। चीन की नजर भी मोदी के रूस दौरे पर है। चीन नहीं चाहता है कि भारत और रूस के बीच बहुत घनिष्टता बढ़े। कुल मिलाकर मोदी ने अब अपनी रूस यात्रा से पश्चिमी देशों को भी यह संदेश देने का प्रयास किया है कि भारत की विदेश नीति किसी का गुलाम नहीं है।
मोदी को रूस का सर्वोच्च सम्मान
