आषाढ़  शुक्ल प्रतिपदा 6 जुलाई से गुप्त नवरात्रि शुरू हो रहे है। नवरात्रि  साल में चार बार आते है जिनमे चैत्र नवरात्रि एवम शारदीय नवरात्रि प्रकट रूप से मनाए जाते है, लेकिन साल में दो बार आने वाले गुप्त नवरात्र को गुप्त रूप से तांत्रिक पूजन  जो वाम मार्गी अर्थात (तंत्र साधक) जप तप द्वारा मनाया जाता है।  देवी भागवत पुराण अनुसार गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्या की दस देवियों की पूजा की जाती है। यह पूजा गुप्त रूप से तांत्रिको एवम अघोर साधकों द्वारा की जाती है। दस महाविद्या - 1 देवी त्रिपुर सुंदरी, 2 देवी तारा, 3 देवी छिन्नमस्तिका, 4 देवी धूमावती, 5 देवी भुवनेश्वरी, 6 देवी मातंगी, 7 देवी दक्षिण काली, 8 देवी बगलामुखी, 9 देवी कमला, 10 देवी षोडशी। दस महाविद्या का शाब्दिक अर्थ ‘महा’ अर्थात महान , विशाल, विराट , तथा विधा, अर्थात, ज्ञान। भगवती मां पार्वती के यह दस रूप धारण करने के कारणों  को चर्चा मुख्यत जगत कल्याण , साधक के कार्य , उपासना की सफलता तथा दानवों का नाश करने के लिए हुई। सर्वरूपमयी देवी, सर्वं देवीमयं जगत। अतोहम् विश्वरूपां तां, नमामि परमेश्वरीम, अर्थात यह सारा संसार शक्ति रूप ही है।

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