नई दिल्ली : प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) डी वाई चंद्रचूड़ ने दिल्ली में हाल में पड़ी भीषण गर्मी के बाद भारी बारिश की ओर इशारा करते हुए मंगलवार को कहा कि जलवायु परिवर्तन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए हरित जीवन शैली अपनाने की आवश्यकता है। सीजेआई राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के कड़कड़डूमा, शास्त्री पार्क और रोहिणी में निचली अदालत भवनों के लिए आधारशिला रखने के वास्ते आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इस साल दिल्ली ने सबसे गर्म मौसम का अनुभव किया। हमने दो उष्ण लहर के बाद एक ही दिन में रिकॉर्ड बारिश का सामना किया। हमारा बुनियादी ढांचा उस वास्तविकता को प्रतिबिंबित करना चाहिए, जिसमें हम रहते हैं - जलवायु परिवर्तन को अब और नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि एक महत्वपूर्ण कदम हमारे दैनिक जीवन में हरित जीवनशैली को शामिल करना है, जिसमें कार्बन उत्सर्जन को कम करना शामिल है। मुझे यह जानकर खुशी हुई कि नयी इमारतें पर्यावरण अनुकूल होंगी और इसका निर्माण इस तरह से किया जाएगा, ताकि वे कम गर्मी अवशोषित करें। सीजेआई ने 18वीं सदी के एक मामले का उल्लेख किया, जिसमें राम कामति के सेवक को उसके नियोक्ता के अपराध को कबूल करने के लिए हिरासत में यातना दी गई थी, यहां तक कि कामति को इस मामले में दोषी भी ठहराया गया था और बाद में जेल में उनकी मृत्यु हो गई। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि हमारी कानूनी और संवैधानिक प्रणाली मूल रूप से न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के गुणों पर आधारित है। अदालतें इन मूलभूत गुणों की संरक्षक हैं। हम अधिकार-आधारित मूल कानूनों और निष्पक्षता-आधारित प्रक्रियात्मक कानूनों को लागू करके उन्हें कायम रखते हैं। उन्होंने कहा कि उस मामले में बाद में यह बात सामने आयी कि दोषी के खिलाफ सबूत गढ़े गए थे। उन्होंने कहा कि राम कामति की कहानी हमें याद दिलाती है कि कठोर, तत्पर और सहज न्याय कानून के शासन और प्रक्रियात्मक गारंटी के लिए अभिशाप है। अदालत का आधार मजबूत होना चाहिए - इसकी संरचनात्मक और दार्शनिक क्षमता दोनों में। इसे संविधान के अलावा किसी और की सेवा नहीं करनी चाहिए और इसे केवल वादियों की सेवा करनी चाहिए। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि अदालतें केवल संप्रभु सत्ता के दर्शनीय स्थल नहीं हैं, बल्कि आवश्यक सार्वजनिक सेवा प्रदाता भी हैं।