आयुर्वेद में रतनजोत का उपयोग सौंदर्य और सेहत, दोनों को निखारने के लिए वर्षों से किया जा रहा है। रतनजोत में एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-वायरल और एंटीऑक्सीडेंट गुणों के साथ नेफ्थोक्विनोन, फ्लेवोनोइड्स, अल्केनिन और शिकोनिन जैसे रसायन भी पाए जाते हैं। जो त्वचा, बालों, अनिद्रा और तनाव जैसी समस्याओं से छुटकारा दिलाने में मदद कर सकते हैं। सेहत और खूबसूरती से जुड़े लाभ लेने के लिए आइए जानते हैं कैसे करें रतनजोत का इस्तेमाल और क्या हैं इसके फायदे।
बालों का रखें ख्याल- रतनजोत बालों की चमक बनाए रखने के साथ उनका टूटना- झडऩा कम करके बालों को घना और लंबा बनाए रखने में मदद करती है। इसके नियमित इस्तेमाल से बालों का रूखापन भी दूर होता है। रतनजोत का तेल बनाने के लिए रतनजोत के दो टुकड़े लें। अब कढ़ाई में सरसों तेल गर्म करके उसमें रतनजोत की जड़ डालकर तेल को धीमी आंच पर पकाते हुए चम्मच से चलाते रहें। तेल पकने के बाद उसे एक कांच की शीशी में भरकर रख लें। यह तेल हफ्ते में 2 बार बालों में लगाएं।
गाठिया रोग में सहायक- कई लोगों को गाठिया या जोड़ों के दर्द की शिकायत रहती है। ऐसे लोगों के लिए रतनजोत का इस्तेमाल फायदेमंद हो सकता है। इसमें मौजूद एंटीबायोटिक और एंटी इंफ्लेमेटरी गुण जोड़ों के दर्द और सूजन में आराम पहुंचाने का काम करते हैं। इस उपाय को करने के लिए रतनजोत के पत्तों में नारियल तेल और हल्दी लगाकर उसे जोड़ों वाली जगह पर लगाने से आराम मिलता है। इसके अलावा रतनजोत के पत्तों को पीसकर भी जोड़ो पर लगाया जा सकता है।
त्वचा के लिए फायदेमंद- रतनजोत का नियमित इस्तेमाल त्वचा के कील-मुहांसों को ठीक करने में मदद कर सकता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-बैक्टीरियल गुण त्वचा के दाग-धब्बों को साफ करके त्वचा का ग्लो बढ़ा सकते हैं।
घाव भरने में फायदेमंद- रतनजोत का उपयोग घाव, खुजली और चकत्ते आदि जैसी समस्याओं को ठीक करने के लिए किया जा सकता है। इसके लिए रतनजोत के पत्तों को पीसकर और उसमें हल्दी मिलाकर घाव पर लगाएं।