इटली में पिछले 13 से 15 जून तक दुनिया के सबसे मजबूत देशों के संगठन जी-7 का शिखर सम्मेलन हुआ। इस सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। सदस्य देशों के अलावा इटली ने अफ्रीका, दक्षिण अमरीका तथा हिंद प्रशांत क्षेत्र के 11 विकासशील देशों को विशेष रूप से आमंत्रित किया था। मालूम हो कि अमरीका, जर्मनी, जापान, इटली, फ्रांस, ब्रिटेन तथा कनाडा इसके सदस्य हैं। इस वक्त दुनिया युद्ध के मुहाने पर खड़ी है। इस वक्त दुनिया दो धड़ों में बंटी दिख रही है। ऐसी स्थिति में जी-7 शिखर सम्मेलन का काफी महत्व है। यूरोपीय यूनियन के अध्यक्ष भी इस सम्मेलन में भाग लिए। सम्मेलन के दौरान यूक्रेन को वित्तीय मदद देने, इजराइल और गाजा के बीच चल रहे युद्ध को रूकवाने, जलवायु परिवर्तन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, लाल सागर में हूति विद्रोहियों द्वारा वाणिज्यिक जहाजों पर लगातार किए जा रहे हमले तथा विश्व में बढ़ती लिंग असमानता जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। जी-7 के सदस्य देशों ने रूस से युद्ध लड़ने के लिए यूक्रेन को 260 बिलियन डॉलर की सहायता देने का निर्णय लिया।

मालूम हो कि पश्चिमी देशों ने प्रतिबंध लगाकर अपने यहां मौजूद रूसी संपत्ति पर प्रतिबंध लगा दिया है। उस संपत्ति से जो ब्याज रूस को मिलता था, उसी ब्याज को यूक्रेन को सहायता के रूप में दी जाएगी। यूक्रेन उसी पैसे से हथियार खरीदकर रूस के खिलाफ युद्ध लड़ेगा। बैठक में चीन की आर्थिक नीति तथा आर्थिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। सदस्य देश इस बात पर सहमत हुए कि इजराइल हमास युद्ध को रोका जाए तथा अपहृत किए गए लोगों को सकुशल वापसी के लिए पहल की जाए। हिंद प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती दादागिरी भी चिंता का विषय बनी हुई है। सम्मेलन के दौरान इस मुद्दे पर भी अगली रणनीति तय की गई। ईसाई धर्म गुरू पोप फ्रांसिस ने भी जी-7 के सम्मेलन को संबोधित किया। इस सम्मेलन के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक मजबूत नेता के रूप में उभरे हैं। अगर जी-7 के देशों पर गौर किया जाए तो इस वक्त अमरीकी राष्ट्रप्रति जो बाइडन, फ्रांस के राष्ट्रपति मेक्रो, जर्मनी के चांसलर, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक, कनाडा के प्रधानमंत्री की स्थिति अपने ही देश में एक कमजोर राष्ट्राध्यक्ष के रूप में उभरी है।

इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी एक मजबूत नेता के रूप में उभर कर सामने आई है। इटली में उनकी पार्टी ब्रदर्स ऑफ इटली की स्थिति लगातार मजबूत हुई है। यूरोपीय यूनियन में भी इटली का दबदबा बढ़ा है। यही कारण है कि मेलोनी की लोकप्रियता बढ़ती जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा इटली के प्रधानमंत्री के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई, जिसमें दोनों देशों ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इटली को अपनी आर्थिक स्थिति की मजबूती के लिए भारत से सहयोग की जरूरत है। दोनों नेताओं की केमिस्ट्री जगजाहिर है। जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा इटली की प्रधानमंत्री के बीच कई समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। जी-7 के प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हुए भारत ने फ्रांस, ब्रिटेन तथा अन्य कई देशों के साथ द्विपक्षीय बैठक कर सहयोग को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। भारत की जीडीपी जी-7 देशों के मुकाबले काफी तेजी से आगे बढ़ रही है। यही कारण है कि जी-7 देश भारत को साथ रखना चाहते हैं। हिंद प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती दादागिरी भी पड़ोसी देशों के अलावा जी-7 देशों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। अमरीका सहित जी-7 के सभी देश यह चाहते हैं कि भारत चीन के खिलाफ बन रही रणनीति में सक्रिय रूप से भाग ले।