पूर्वांचल प्रहरी डेस्क संवाददाता गुवाहाटी : मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा ने राज्य में वीआईपी संस्कृति को समाप्त कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. शर्मा ने मंत्रियों, विधायकों और शीर्ष सरकारी अधिकारियों को पहली जुलाई से सरकारी आवासों के बिजली बिल का भुगतान अपने पास से करने का निर्देश दिया है। रविवार को दिसपुर के जनता भवन में आयोजित एक बैठक में सीएम ने इसकी घोषणा की। सीएम ने कहा कि अब से मंत्रियों, विधायकों और सरकारी अधिकारियों के मर्टरों में मुफ्त बिजली व्यवस्था खत्म हो जाएगी। पहली जुलाई से उन्हें बिजली बिल का भुगतान अपनी तरफ से करना होगा। गौरतलब है कि देश की आजादी के बाद पहली बार मुख्यमंत्री और मंत्रियों सहित शीर्ष सरकारी अधिकारियों के आवासों पर मुफ्त बिजली की आपूर्ति में कटौती की जाएगी। मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि इससे गरीबों और मध्यम वर्ग के बिजली बिल का बोझ कम होगा और एपीडीसीएल का राजस्व बढ़ेगा। मुख्यमंत्री ने 1 अप्रैल 2025 से एक रुपया और 2026 में 50 पैसे के हिसाब से बिजली दरों को कम करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ने के लिए एपीडीसीएल को सलाह दी है। स्वाभाविक रूप से, कर कटौती के बोझ से राहत देने की मुख्यमंत्री की घोषणा को जनता ने सराहा। लेकिन लोगों के मन में अभी भी सवाल है कि क्या मंत्री, विधायक और सरकारी अधिकारी वास्तव में, जैसा कि मुख्यमंत्री ने कहा है, बिजली बिल का भुगतान करेंगे? अगर वे भुगतान नहीं करेंगे तो क्या अन्य आम लोगों की तरह मंत्रियों, विधायकों और अधिकारियों के आवासों की बिजली काट दी जाएगी? गौरतलब है कि सरकार बिजली बिल जमा करने के लिए आम उपभोक्ताओं पर प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगा रही है। आम सरकारी कर्मचारियों को भी वेतन तभी मिलता था जब वे बिजली बिल के भुगतान का प्रमाण देते थे। लेकिन इसके बावजूद राज्य सरकार के विभिन्न विभागों ने एपीडीसीएल को अपने सैकड़ों करोड़ रुपए के बिजली बिल का भुगतान नहीं किया है। सरकारी विभागों में बिजली की भारी बर्बादी और खपत हो रही है। सरकार को बिजली की बर्बादी रोकने के लिए सरकारी कार्यालयों में स्वचालित बिजली कटौती शुरू करनी पड़ रही है। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद अब एपीडीसीएल को एक माह के अंदर मुख्यमंत्री आवास समेत मंत्रियों, विधायकों और अधिकारियों के आवासों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाना होगा। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री के सरकारी आवास के साथ कई आवास संयुक्त हैं। इसलिए एपीडीसीएल को सभी आवासों में अलग-अलग स्मार्ट मीटर लगाने होंगे। ऐसे में इस बात पर सभी की नजर रहेगी कि मुख्यमंत्री की यह घोषणा चौंकाने वाली है या हकीकत।