पूर्वांचल प्रहरी संवाददाता गुवाहाटीः मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा ने असम को हरा-भरा बनाने के राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी प्रयासों के तहत लोकसेवा भवन में आयोजित एक समारोह में जनता भवन परिसर में 2.5 मेगावाट क्षमता वाली एक सौर ऊर्जा परियोजना का औपचारिक रूप से उद्घाटन किया। इसके जरिए राज्य का प्रशासनिक केंद्र, जनता भवन आज हरित ऊर्जा द्वारा संचालित होने वाला देश का पहला नागरिक सचिवालय बन गया। इस परियोजना को असम पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड और मेसर्स माधव एंटरप्राइजेज द्वारा केवल 75 दिनों के भीतर कार्यान्वित किया गया। लागत 12.56 करोड़ रुपए की लागत की इस परियोजना के तहत जनता भवन के विभिन्न ब्लॉकों, आस-पास के क्षेत्रों और मंत्री के आवास के परिसर की छतों और परिसरों पर एक हाइब्रिड मॉडल के रूप में लगभग 5,000 सौर पैनल स्थापित किए गए हैं। इस अवसर पर अपने संबोधन में मुख्यमंत्री डॉ. शर्मा ने आज के दिन को राज्य के लिए ऐतिहासिक दिनों के रूप में याद किया जाएगा।

उन्होने कहा कि जनता भवन में 2.5 मेगावाट सौर ऊर्जा परियोजना के उद्घाटन के साथ, जनता भवन परिसर देश का पहला हरित सचिवालय बन गया है। उन्होंने कहा कि असम सचिवालय को प्रतिदिन 2.5 मेगावाट बिजली की आवश्यकता होती है और राज्य सरकार को इसके लिए असम विद्युत वितरण निगम लिमिटेड को प्रति माह 30 लाख रुपए का भुगतान करना पड़ता है। आज से इस सौर ऊर्जा परियोजना के चालू होने से पूरा जनता भवन परिसर सौर ऊर्जा से संचालित होगा और राज्य सरकार प्रति माह 30 लाख रुपए की बचत कर सकेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जनता भवन में जिस सौर ऊर्जा परियोजना का उद्घाटन किया गया, उसकी लागत सरकार बिजली की बचत से मात्र छह साल में वसूल कर लेगी। इस परियोजना का जीवन 25 वर्ष है। इस अवधि के दौरान परियोजना से कार्बन उत्सर्जन में लगभग 76,500 मीट्रिक टन की कमी आएगी जो जलवायु परिवर्तन शमन में महत्वपूर्ण योगदान देगी। मुख्यमंत्री ने असम के सभी सरकारी भवनों में सौर ऊर्जा उत्पादन के निरंतर उपयोग पर जोर दिया। पहले चरण में विशेष रूप से मेडिकल कॉलेजों और फिर विश्वविद्यालयों में सौर पैनल लगाने का सुझाव देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे सरकार को महत्वपूर्ण राजस्व की बचत होगी और जलवायु परिवर्तन शमन में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि नामरूप थर्मल पावर प्लांट के पास स्थापित होने वाले 25 मेगावाट के सौर ऊर्जा संयंत्र की आधारशिला पहले ही 14 जून को रखी जा चुकी है।