भारतीय संस्कृति अपने आपमें अनूठी है, हिन्दू धर्मशास्त्रों के अनुसार प्रत्येक माह के व्रत त्योहार जयन्ती की विशेष महिमा है। विशिष्ट माह की विशिष्ट तिथियों पर देवी-देवताओं का प्राकट्य दिवस श्रद्धा भक्तिभाव से मनाए जाने की धाॢमक व पौराणिक परम्परा है। ज्योतिषविद् विमल जैन ने बताया कि ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के दिन राजा भगीरथ की विशेष तपस्या से गंगाजी का अवतरण स्वर्ग से पृथ्वी पर हुआ था। गंगाजी को समस्त नदियों में सर्वोपरि माना गया है। ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष दशमी तिथि को संवत्सर का मुख भी माना गया है। इस बार गंगा दशहरा 16 जून, रविवार को विधि विधानपूर्वक मनाया जाएगा।
ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 15 जून, शनिवार को अद्र्धरात्रि के पश्चात 2 बजकर 33 मिनट पर लगेगी जो कि अगले दिन 16 जून, रविवार को अद्र्धरात्रि के पश्चात 4 बजकर 44 मिनट तक रहेगी। इस दिन हस्त नक्षत्र 15 जून, शनिवार को प्रात: 8 बजकर 14 मिनट से 16 जून, रविवार को दिन में 11 बजकर 13 मिनट तक रहेगा। गंगा दशहरा के पावन पर्व पर गंगा स्नान करने पर 10 जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है। जिसमें 3 प्रकार कायिक (शारीरिक), 4 प्रकार के वाचिक, 3 प्रकार के मानसिक दोषों का शमन होता है।
गंगा-आराधना की विधि : इस पर्व पर माता गंगाजी की पंचोपचार या षोडशोपचार पूजा करनी चाहिए। पूजा के अंतर्गत 10 प्रकार के फूल अर्पित करके 10 प्रकार के नैवेद्य, 10 प्रकार के ऋतुफल, 10 ताम्बूल, दशांग, धूप के साथ 10 दीपक प्रज्वलित करना चाहिए। गंगा अवतरण से संबंधित कथा का श्रवण, श्रीगंगा स्तुति एवं श्रीगंगा स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। ज्योतिषविद् विमल जैन ने बताया कि आज गंगा दशहरा के पर्व पर स्नान-ध्यान करने के पश्चात आज विशेष पर्व पर स्नान-ध्यान देव-अर्चना के पश्चात् दस ब्राह्मणों को 10 सेर तिल, 10 सेर जौ, 10 सेर गेहूं दक्षिणा के साथ दान देने पर जीवन में अनन्त पुण्यफल की प्राप्ति होती है।
आज के दिन रात्रि जागरण का भी विशेष महत्व है। गंगा अवतरण से संबंधित कथा का श्रवण एवं श्री गंगा स्तुति, श्रीगंगा स्तोत्र का पाठ भी किया जाता है। अपनी दिनचर्या नियमित संयमित रखते हुए गंगा दशहरा का पावन पर्व हर्ष व उमंग के साथ मनाने से जीवन में सुख-समृद्धि-खुशहाली मिलती है।
मो. : 09335414722