नई दिल्ली : अट्ठारहवीं लोकसभा के चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की जीत के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता नरेन्द्र मोदी ने लगातार तीसरी बार रविवार को भारत के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें यहां राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसके साथ ही मोदी ने लगातार तीन बार प्रधानमंत्री बनने के देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली। ईश्वर के नाम पर शपथ लेने वाले 73 वर्षीय मोदी के साथ ही भाजपा के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह, अमित शाह, नितिन गडकरी, निर्मला सीतारमण और एस जयशंकर ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली, जो यह दर्शाता है कि प्रधानमंत्री निरंतरता और अनुभव पर जोर दे रहे हैं, क्योंकि शपथ लेने वाले ज्यादातर नेता उनके दूसरे कार्यकाल में भी महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

पार्टी अध्यक्ष जे पी नड्डा पांच साल बाद कैबिनेट में लौटे हैं, जबकि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर मोदी कैबिनेट में नए चेहरे हैं। भाजपा नेता पीयूष गोयल, ज्योतिरादित्य सिंधिया, धर्मेंद्र प्रधान और भूपेंद्र यादव ने भी कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली। ये सभी पहले राज्यसभा में थे, लेकिन अब लोकसभा के लिए चुने गए हैं। असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल, अश्विनी वैष्णव, वीरेंद्र कुमार, प्रह्लाद जोशी, गिरिराज सिंह और जुएल उरांव ने भी मंत्री पद की शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सभी को पद व गोपनीयता की शपथ दिलाई। मोदी 2014 में लोकसभा चुनाव में भाजपा की जीत के बाद पहली बार देश के प्रधानमंत्री बने थे। इसके बाद 17वीं लोकसभा के चुनाव में भारी बहुमत से जीत के बाद वह लगातार दूसरी बार प्रधानमंत्री बने। नेहरू 1947 में देश के आजाद होने के बाद से सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले भारतीय प्रधानमंत्री हैं। उनकी मृत्यु 27 मई 1964 को हुई थी और वह उस समय भी देश के प्रधानमंत्री थे। साल 1952 में हुए पहले आम चुनाव में जीत के बाद वह पहली बार प्रधानमंत्री निर्वाचित हुए थे। इसके बाद 1957 और 1962 के आम चुनावों में भी कांग्रेस ने जीत दर्ज की और नेहरू फिर देश के प्रधानमंत्री बने। साल 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा पूर्ण बहुमत हासिल नहीं कर पाई है। उसे 240 सीटें मिली हैं।

हालांकि, भाजपा नीत राजग ने 293 सीटों के साथ बहुमत के आंकड़े को पार कर लिया। इसके बाद राजग की बैठक में मोदी को पिछले दिनों भाजपा और राजग संसदीय दल का नेता चुना गया था। नेता चुने जाने के बाद मोदी ने राष्ट्रपति भवन जाकर द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की थी और सरकार बनाने का दावा पेश किया था। शपथ लेने वालों में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के अलावा जनता दल (सेक्युलर) के एच डी कुमारस्वामी, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के चिराग पासवान, जद (यू) के राजीव रंजन सिंह और रामनाथ ठाकुर , तेदेपा के रामामोहन रेड्डी, हम (सेक्युलर) के प्रमुख जीतन राम मांझी, अपना दल (एस) की अनुप्रिया पटेल सहित राजग के घटक दलों के कई प्रमुख नेता भी शामिल हैं। शपथ ग्रहण समारोह में देश और विदेश के कई शीर्ष नेता भी शामिल हुए। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे भी इस मौके पर मौजूद थे, हालांकि कई विपक्षी नेता समारोह में शामिल नहीं हुए। इस मौके पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, तेदेपा अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू और जद(यू) प्रमुख नीतीश कुमार भी मौजूद थे।

बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान, रजनीकांत, उद्योगपति मुकेश अंबानी और गौतम अडानी शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत करने वालों में शामिल थे। मोदी को तीसरे कार्यकाल में जनादेश पूर्व के दो कार्यकालों की तरह नहीं मिला है। इस बार के लोकसभा चुनाव में भाजपा अपने दम पर बहुमत हासिल करने में विफल रही। चुनाव से पूर्व भाजपा ने चार सौ पार का नारा दिया था, लेकिन वह अपने गठबंधन के सहयोगियों के साथ तीन सौ के आंकड़े को भी पार नहीं कर सकी। इस लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और ‘इंडिया’ गठबंधन ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया और उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान सहित कई हिन्दी पट्टी के क्षेत्रों में भाजपा के रथ को रोकने में सफलता हासिल की। यही कारण रहा कि नतीजों के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव परिणामों को मोदी की ‘नैतिक हार’ करार दिया। कांग्रेस को इस चुनाव में 99 सीटों पर सफलता मिली। बहरहाल, यह भाजपा की विशाल राजनीतिक उपस्थिति का ही परिणाम है कि लगातार तीसरे लोकसभा चुनाव में वह 240 सीटें हासिल कर सबसे बड़े दल के तौर पर उभरी। भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने 293 सीटें जीती हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे किसी भी चुनाव-पूर्व गठबंधन की सबसे बड़ी सफलता करार दिया है।

शपथ ग्रहण समारोह के अवसर पर मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू, नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दाहाल प्रचंड और श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे सहित भारत के पड़ोस और हिंद महासागर क्षेत्र के कई शीर्ष नेता मौजूद थे। मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद कुमार जगन्नाथ, उनके भूटानी समकक्ष शेरिंग टोबगे, बांग्लादेश की राष्ट्रपति शेख हसीना और सेशेल्स के उपराष्ट्रपति अहमद अफीफ भी शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए। विदेशी नेताओं में मुइज्जू की यात्रा काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि यह भारत और मालदीव के बीच संबंधों में जारी तनाव के समय हुई है। शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के बाद सभी नेता राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति मुर्मू द्वारा आयोजित भोज में भी शामिल होंगे।

क्षेत्रीय समूह दक्षेस (दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन) देशों के नेताओं ने मोदी के पहले शपथ ग्रहण समारोह में भाग लिया था, जब उन्होंने भाजपा की शानदार चुनावी जीत के बाद प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला था। मोदी जब 2019 में लगातार दूसरी बार प्रधानमंत्री बने तो उनके शपथ ग्रहण समारोह में बिम्सटेक देशों के नेता शामिल हुए थे। मोदी और नयी मंत्रिपरिषद के शपथ ग्रहण समारोह में राजनीतिक नेताओं और समाज के विभिन्न क्षेत्रों की जानी-मानी हस्तियों के अलावा ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्यों के साथ ही सफाई कर्मचारी और मजदूर भी शामिल हुए। इस भव्य आयोजन के लिए राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में लगभग 9,000 लोग उपस्थित थे।