नई दिल्लीः लोकसभा चुनाव में सबसे बड़ा उलटफेर उत्तर प्रदेश में हुआ है। यहां भाजपा को करारा झटका लगा है। यहां राम मंदिर का मुद्दा भी बेअसर दिखा। यह झटका किसी और ने नहीं बल्कि समाजवादी पार्टी और उसके प्रमुख अखिलेश यादव ने दिया है। जिन सीटों पर पिछले चुनाव में भाजपा ने लाखों वोटों की लीड बनाई थी, उन सीटों को भी सपा और उसकी सहयोगी कांग्रेस ने जीत लिया है। मोदी सरकार और योगी सरकार के कई मंत्री अपना ही चुनाव हार गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी वाराणसी से केवल डेढ़ लाख वोटों से ही जीत हासिल कर सके हैं। अयोध्या, प्रयागराज जैसी सीटें भी भाजपा के हाथ से निकल गई हैं। ऐसे में सबसे बड़ा फायदा अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी को हुआ। अखिलेश के करियर की भी यह सबसे बड़ी जीत है। अखिलेश की सपा देश के सबसे बड़े राज्य यूपी की 80 में से 40 से ज्यादा सीटें अपनी सहयोगी कांग्रेस के साथ जीत रही है। इस बार लोगों को अखिलेश व राहुल का साथ पसंदा आया। यूपी के नक्शे पर अगर आज के चुनाव नतीजों को देखें तो आधी यूपी सपा की लाल टोपी के रंग में रंगी नजर आती है। अखिलेश की रणनीति का ही नतीजा था कि मोदी-योगी का जादू भले ही दूसरे राज्यों मे चलो हो लेकिन यूपी में नहीं चला। भाजपा    जीती हुई करीब 30 सीटें हार गई है। अखिलेश यादव को यूपी में सरकार का नेतृत्व करने का मौका 2012 में पहली बार मिला था। हालांकि उस चुनाव का पूरा प्रचार मुलायम सिंह यादव ने ही किया था। मायावती के खिलाफ माहौल ने सपा को पहली बार अकेल बहुमत दिया था। इसके बाद सपा में दो फाड़ हुआ और अखिलेश कई मुश्किलों के बीच सरकार और संगठन को संभालते रहे। इस बीच हुए 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव के साथ ही 2017 और 2022 का विधानसभा चुनाव भी हार गए। लगातार हार के बाद भी अखिलेश के जोश में कोई कमी कभी नजर नहीं आई। 2022 में तो उनकी रणनीति और प्रचार ने फिर से यूपी में सपा सरकार की चर्चा तेज कर दी थी। वह अपनी सीटें भी दोगुनी करने में सफल हुए लेकिन बहुमत से काफी दूर रह गए। 2022 के चुनाव में सपा ने जो रणनीति अपनाई उसी को इस चुनाव में विस्तार दिया। 2022 में गैर-यादव ओबीसी के साथ ही गैर-जाटव दलित कार्ड खेला। समाजवादी पार्टी ने भाजपा के खेमे में शामिल रहे ओम प्रकाश राजभर के अलावा दारा सिंह चौहान को साथ लेकर बिसात बिछाई थी और 125 सीटें हासिल कर भाजपा को कड़ी चुनौती पेश की थी। इसी तर्ज पर इस बार पीडीए यानि पिछड़ा, दलित अल्पसंख्यक के साथ ही आधी आबादी का नारा दिया। गैर यादव ओबीसी और दलित प्रत्याशियों को तवज्जो दी। इसका असर हर तरफ दिख रहा है। मोदी-योगी की जोड़ी भी अखिलेश की रणनीति का तोड़ नहीं निकाल सकी। पूरी भाजपा अखिलेश पर हमले करती रही और वह पीडीए पर ही उसे घेरते रहे। एक बार भी अपने मुद्दे से हटे नहीं। यहां तक कि भाजपा को हिन्दू मुसलमान खेलने का भी कोई मौका नहीं दिया।