अरुणाचल प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 60 में से 46 सीटों पर विजय हासिल कर धमाकेदार वापसी की है। मुख्यमंत्री पेमा खांडु के नेतृत्व में भाजपा ने तीसरी बार अरुणाचल की गद्दी पर कब्जा किया है। राज्य में 19 अप्रैल को 60 में से 50 विधानसभा सीटों के लिए मतदान हुआ था। भाजपा ने 10 सीटें पहले ही निर्विरोध जीत ली थी। वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 41 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। पेमा खांडु ने अपने पिता तथा अरुणाचल के पूर्व मुख्यमंत्री दोरजी खांडु की दुर्घटना में मौत के बाद वर्ष 2011 में विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री नबाम टुकी के नेतृत्व वाली अरुणाचल सरकार में वे मंत्री बने थे। उसके बाद वर्ष 2016 में कांग्रेस से बगावत कर खांडु भाजपा में शामिल हुए तथा मुख्यमंत्री बने। वर्ष 2019 में हुए विधानसभा चुनाव में भी भाजपा बहुमत में आई तथा खांडु दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री बने थे। अब तीसरी बार भाजपा अरुणाचल में फिर से सत्ता में आई है। क्षेत्रीय पार्टी एनपीपी को पांच सीटों पर जीत हासिल हुई है जबकि कांग्रेस को केवल एक सीट पर संतोष करना पड़ा है। बाकी की आठ सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने विजय दर्ज की है। कुल मिलाकर कभी कांग्रेस का गढ़ रहा अरुणाचल अब कांग्रेस के हाथ से निकल चुका है। विधानसभा चुनाव में भाजपा की मजबूत स्थिति का लाभ लोकसभा चुनाव में मिलना निश्चित है। एग्जिट पोल में भी अरुणाचल की दोनों सीटों पर भाजपा की जीत को दिखाया गया है। लेकिन सिक्किम में विधानसभा चुनाव बिल्कुल अलग परिणाम दे रहा है। प्रेम सिंह तमांग के नेतृत्व वाली स्थानीय पार्टी सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (एसकेएम) ने 32 में से 31 सीटों पर बड़ी जीत दर्ज कर विपक्षी दलों को सफाया कर दिया है। एक सीट पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग की नेतृत्व वाली सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ) को मिला है। आश्चर्य की बात यह है कि पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग दोनों जगहों से चुनाव हार गए हैं। एक समय था जब प्रेम सिंह तमांग पवन कुमार चामलिंग को अपना राजनीतिक गुरु मानते थे। 1990 में तमांग ने एसडीएफ से ही अपनी राजनीति शुरू की थी। बाद में चामलिंग से मतभेद होने के बाद प्रेम सिंह तमांग ने वर्ष 2013 में एसकेएम के नाम से नई पार्टी का गठन किया। वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में तमांग ने एसडीएफ को सत्ता से उखाड़ फेंका। 32 सदस्यीय सिक्किम विधानसभा में एसकेएम को 17 सीटें हासिल हुई थी। तमांग लगातार अपनी राजनीतिक पृष्ठभूमि को मजबूत करते जा रहे हैं। लेकिन सिक्किम विधानसभा का चुनाव भाजपा के लिए एक बड़ा झटका है। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा को दो सीटों पर जीत मिली थी। उसके बाद एसडीएफ के दस विधायक भी भाजपा में शामिल हो गए थे। कुल 12 विधायक वाली भाजपा को सिक्किम में खाता नहीं खुला। कई जगहों पर भाजपा उम्मीदवारों की जमानतें भी जब्त हो गईं। चुनाव विभाग के अनुसार सिक्किम भाजपा को 5.18 प्रतिशत ही मत प्राप्त हुए हैं। कुल मिलाकर यह देखा गया है कि अरुणाचल एवं सिक्किम में सत्ताधारी दलों की जोरशोर से वापसी हुई है। सिक्किम में राष्ट्रीय मुद्दों की जगह स्थानीय मुद्दे हावी रहे, जबकि अरुणाचल में स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ राष्ट्रीय मुद्दों को भी तरजीह मिली। 4 जून को होने वाली मतगणना पर पूरे देश की नजर टिकी हुई है। देखना है कि सिक्किम में भी लोकसभा की एकमात्र सीट पर एसकेएम का कब्जा होता है या एसडीएफ का। ऐसा लगता है कि सिक्किम मोदी लहर से प्रभावित नहीं हुआ है।
अरुणाचल में भाजपा व सिक्किम में एसकेएम की वापसी
