हमारे ब्रह्मांड की सबसे बड़ी दिमाग को चकरा देने वाली विचित्रता टाइमकीपिंग में मौजूद परेशानी है। इसमें पृथ्वी की घाटियों की तुलना में किसी पहाड़ पर सेकंड बहुत तेजी से बीतता है। व्यावहारिक उद्देश्यों के लिए आम जीवन में हमें इस अंतर को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं। लेकिन जब आज के समय एक बार फिर स्पेस रेस चल रही है, जिसमें अमेरिका और चीन सबसे पहले चांद पर बस्ती बनाने में लगे हैं। इसी कारण एक बार फिर समय की विचित्रता सबसे आगे आ गई है। ऐसा इसलिए क्योंकि चंद्रमा की सतह पर पृथ्वी का एक दिन हमारे अपने समय से 56 माइक्रोसेकंड छोटा होता है। एक ऐसी संख्या जो लंबे समय के साथ समय में विसंगतियों को जन्म देती है। नासा और उसके सहयोगी फिलहाल इस पहले से जूझ रहे हैं।

नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर में चंद्रमा की स्थिति, नेविगेशन और समय और मानकों के प्रमुख चेरिल ग्रैमलिंग ने कहा, वैज्ञानिक चंद्रमा पर सिर्फ एक नया टाइम जोन बनाने की कोशिश नहीं कर रहे हैं। बल्कि स्पेस एजेंसी एक पूरी तरह से नया टाइम स्केल या माप प्रणाली बनाना चाहते हैं, जो इस बात का ध्यान रखे कि चंद्रमा पर सेकंड तेजी से चलता है। स्पेस एजेंसी का लक्ष्य विशेष रूप से चंद्रमा के लिए समय पर नजर रखने की एक नई विधि स्थापित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ काम करना है। वाइट हाउस के एक हालिया ज्ञापन ने नासा को 31 दिसंबर तक इस नए टाइम स्केल के लिए अपनी योजनाओं को रेखांति करने का निर्देश दिया। मेमे में यह भी कहा गया कि 2026 तक नासा ऐसे सिस्टम लागू करे। उसी वर्ष अंतरिक्ष एजेंसी पांच दशकों में पहली बार अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर वापस लाने का लक्ष्य बना रही है।

दुनिया के टाइमकीपरों के लिए आने वाले महीने यह पता लगाने के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं कि चंद्र समय को सटीक रूप से कैसे रखा जाए और चंद्रमा पर घडिय़ां कैसे, कब और कहां लगाई जाए। अगर पहाड़ी की चोटियों पर समय समुद्र तटों की तुलना में अलग तरह से चलता है तो आप कल्पना कर सकते हैं कि पृथ्वी से जितनी दूर की यात्रा करेंगे यह और भी विचित्र हो जाएगा। आइंस्टीन की थ्योरी ऑफ स्पेशल रिलेटिविटी के मुताबिक व्यक्ति या अंतरिक्ष यान जितना तेजी से आगे बढ़ता है, समय भी उतना ही धीमे गुजरता है। यूएस नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्टैंडर्ड्स एंड टेक्नोलॉजी के सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी डॉ बिजुनाथ पटला ने कहा कि इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पृथ्वी की सतह से 322 किमी ऊपर परिक्रमा करता है। एक दिन में यह 16 बार ग्रह की परिक्रमा करता है, इसलिए सापेक्षता का प्रभाव कुछ हद तक एक दूसरे को रद्द कर देता है।