पूर्वांचल प्रहरी निज संवाददाता मार्घेरिटा: पटकाई पहाड़ियों में भूमिगत कोयला खनन के दौरान तीन मजदूरों के गत शुक्रवार को जिंदा दफन होने की घटना से इलाके में सनसनी फैल गई है। समाचार लिखे जाने तक बचाव कार्य जारी था। हालांकि, भीषण भूस्ख्लन के कारण खदान में फंसे मजदूरों के जिंदा होने की संभावना कम व्यक्त की जा रही है। जानकारी के अनुसार भूमिगत खदान में तीनों श्रमिक कोयला खनन के लिए गए थे और इसी दौरान पूरा खदान धंस  गया, जिससे तीनों खदान में जिंदा दफन हो गए। शुक्रवार को दोपहर लगभग 12.30 बजे चार मजदूर लिडू  टिकाक कोलियारी के अंतर्गत बरगोलाई-नामदांग के बीच टिकाक वेस्ट माइनिंग में अवैध रूप से निर्मित भूमिगत खनन में कोयला खनन करने गए थे।

इनमें से तीन मजदूर खनन के लिए अंदर गए और एक मजदूर बाहर से उनकी मदद कर रहा था। अचानक भूस्खलन के कारण खनन का रास्ता बंद हो गया, जिससे तीन मजदूर वहां फंस गए और उनकी मौत हो गई। यह घटना बाहर खड़े मजदूर की आंखों के सामने हुई। अवैध भूमिगत खादान में फंसे तीन मजदूरों में से एक नेपाल के भुजपुर का दावा शेरपा है और अन्य दो मेघालय के जॉन और फिनाल नामक व्यक्ति बताए जा रहे हैं। तीनों श्रमिक बरगोलाई तेलखाद बस्ती अंचल में किराए के घर में रहते थे। खबर मिलते ही तत्काल पुलिस और नॉर्थ ईस्ट कोलफील्ड्स के आला अधिकारी मौके पर पहुंच गए।

फंसे मजदूरों को निकालने के लिए बचाव कार्य जारी है। दूसरी ओर असम जातीयतावादी युवा छात्र परिषद की मार्घेरिटा आंचलिक समिति ने कहा कि मार्घेरिटा के नामडांग, बरगोलाई लिडू, टिकाक के कोल इंडिया क्षेत्र में कोयले का अवैध खनन जारी है। अवैध कोयला खनन के कारण आम मजदूरों की जान जा रही है। परिषद की मार्घेरिटा आंचलिक समिति के अध्यक्ष बिमल सिंह और सचिव राजीव रंगरांग ने मार्घेरिटा उपमंडल प्रशासन से मांग की है कि घटना की उचित जांच की जाए। अगर प्रशासन अगले 72 घंटों के भीतर कोई कार्रवाई नहीं करता है, परिषद ने आने वाले दिनों में लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने की चेतावनी दी है।