नई दिल्ली : म्यामां में करीब तीन साल पहले सैन्य तख्तापलट के बाद सीमा पार से पूर्वोत्तर में अवैध तरीके से पहुंचने वाले शरणार्थियों की भारी तादाद के कारण इलाके में नशीली वस्तुओं की तस्करी में काफी वृद्धि दर्ज की गई है। खासकर बीते साल मणिपुर में शुरू हुई हिंसा के बाद तो यह समस्या और जटिल हो गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बीते सात साल में नशीली वस्तुओं की तस्करी के आरोप में करीब तीन हजार लोगों को गिरफ्तार कर 7,887 करोड़ की नशीली वस्तुएं जब्त की गई हैं। पुलिस का कहना है कि तस्कर गिरोह अब मादक पदार्थों की तस्करी के लिए नए रास्ते अपना रहे हैं। मणिपुर पुलिस ने बीते महीने कद्दू में भर कर साढ़े तीन करोड़ की ब्राउन शुगर की तस्करी करने वाले एक गिरोह के कुछ लोगों को गिरफ्तार कर साढ़े तीन करोड़ की मादक वस्तुएं जब्त की थी। उस समय मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने तस्वीरों के साथ इस बारे में एक ट्वीट किया था।
मणिपुर और मिजोरम में शायद ही कोई सप्ताह ऐसा गुजरता है जब नशीली वस्तुओं की कोई बड़ी खेप नहीं पकड़ी जाती है। मिजोरम सरकार ने भी राज्य में नशीली वस्तुओं की बढ़ती तस्करी के लिए मणिपुर की हिंसा को जिम्मेदार ठहराया है। मणिपुर सरकार ने बीते सात वर्षों के दौरान सीमा पार से पहुंचने वाली करीब आठ हजार करोड़ की नशीली वस्तुएं जब्त की हैं। इन मामलों में करीब तीन हजार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। राज्य सरकार की ओर से जारी एक बयान में इसकी जानकारी देते हुए बताया गया है कि राज्य में जातीय हिंसा शुरू होने के बाद ऐसे मामले तेजी से बढ़े हैं। राज्य सरकार ने बीते साल मणिपुर के पर्वतीय इलाको में 16 हजार एकड़ से ज्यादा इलाके में लगी अफीम की फसलें नष्ट कर दी थीं। राज्य सरकार के एक अधिकारी नाम नहीं छापने की शर्त पर कहते हैं, म्यामां से नशीली वस्तुओं की तस्करी का सिलसिला तो दशकों पुराना है। लेकिन बीते साल शुरू हुई हिंसा के बाद सुरक्षा की स्थिति कुछ कमजोर होने के कारण सीमा पार से तस्करी कई गुनी बढ़ गई है।
इस दौरान मणिपुर के अलावा पड़ोसी मिजोरम और असम में भी सीमा पार से आने वाली नशीली वस्तुओं की बरामदगी में तेजी आई है। वर्ष 2022-23 के दौरान पर्वतीय इलाकों में 4305 एकड़ में लगी अफीम की फसल को नष्ट किया गया था। मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने कुछ समय पहले जारी अपने एक वीडियो बयान में बताया था कि वर्ष 2006 के बाद राज्य के म्यामां से सटे पर्वतीय इलाकों में कम से कम 996 नए गांव बस गए हैं। इससे साफ होता है कि सीमा पार से कितने बड़े पैमाने पर घुसपैठ हो रही है। सीमा पार से आने वाले इन घुसपैठियों में ज्यादातर लोग नशीली वस्तुओं की तस्करी या अफीम की खेती से जुड़े हैं। दरअसल, पूर्वोत्तर में सीमा पार से नशीली वस्तुओं की तस्करी की समस्या दशकों पुरानी है। लेकिन बीते साल मणिपुर में शुरू हुई जातीय हिंसा और अफगानिस्तान में अफीम की खेती पर तालिबान सरकार की ओर लगाई गई पाबंदी के बाद म्यामां में अफीम की खेती बढ़ी है और इसमें से ज्यादातर मणिपुर और मिजोरम के रास्ते ही भारत के दूसरे शहरों में भेजा जाता है।
यूनाइटेड नेशंस ऑफिस ऑन ड्रग्स एंड क्राइम (यूएनओडीसी) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार की ओर से अफीम की खेती के खिलाफ शुरू किए गए अभियान के बाद वहां इसमें 95 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। इसी वजह से वर्ष 2023 में म्यामां दुनिया का सबसे बड़ा अफीम उत्पादक देश बन गया। म्यामां में तख्तापलट के बाद आर्थिक अस्थिरता के कारण ज्यादातर किसान अफीम की खेती करने लगे। राज्य सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि मणिपुर में शुरू हुई हिंसा ने इस पैदावार को खपाने में अहम भूमिका निभाई। इसके लिए सीमा पार से आने वाले लोगों को जरिया बनाया गया। दूसरी ओर, पड़ोसी मिजोरम में सीमा पार से आने वाले शरणार्थियों के कारण वहां भी शराब और नशीली दवाओं का अवैध कारोबार तेजी से बढ़ा है। वहीं असम पुलिस ने हाल ही में करीब दस किलो हेरोइन जब्त की है, जो मिजोरम के चंफाई जिले से देश के दूसरे हिस्से में ले जाई जा रही थी। कछार के पुलिस अधीक्षक नूमल महट्टा के मुताबिक, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इस हेरोइन की कीमत 105 करोड़ रुपए है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मणिपुर की समस्या का समाधान नहीं होने तक राज्य में नशीली वस्तुओं की तस्करी पर अंकुश लगाना संभव नहीं है। म्यामां से सटे राज्य के पर्वतीय इलाकों में कुकी जनजाति के लोगों की आबादी है। वहां फिलहाल सुरक्षा व्यवस्था बेहद कमजोर है। सीमापार से आने वाले लोग या तस्कर वहीं शरण लेते हैं।