हिन्द महासागर में चीन की बढ़ती आक्रामकता और लालसागर में संवेदनशील स्थिति को देखते हुए भारतीय नौसेना को भी कमर कसने की जरूरत होगी। नौसेना के प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय नौसेना को राष्ट्रीय समुद्री हितों की रक्षा के लिए हर समय युद्ध की दृष्टि से तैयार रहना चाहिए। नई दिल्ली में सेना मुख्यालय में अधिकारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की समुद्री शक्ति की प्राथमिक अभिव्यक्ति के रूप में भारतीय नौसेना का उद्देश्य हर संभावित खतरे के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने उभरती चुनौतियों के समाधान के लिए घरेलू समाधान खोजने, नवाचार और विशिष्ट प्रौद्योगिकियों को अपनाने पर जोर दिया। यह सबको मालूम है कि अगर भविष्य में चीन के साथ युद्ध होता है तो नौसेना ही निर्णायक भूमिका में होगी। थल और वायु सेना पहले से ही मजबूत स्थिति में है। ऐसी स्थिति में चीन अपने नौसेना के माध्यम से भारत पर दबाव बनाने की कोशिश करेगा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारत ने भी अपनी नौसेना को मजबूत और आधुनिक करना शुरू कर दिया है।
हाल ही में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने अपने बयान में कहा है कि भारत जल्द ही अपने तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर को समुद्र में उतार देगा। फिलहाल भारत के पास दो एयरक्राफ्ट कैरियर हैं। चीन के पास भी दो ही एयरक्राफ्ट कैरियर हैं जबकि उसका तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर ट्रायल की स्थिति में है। हाल के कुछ वर्षों में चीन हिन्द महासागर में अपना दबदबा बढ़ाने के लिए प्रयासरत है। इसके लिए वह भारत के पड़ोसी देशों, श्रीलंका, मालदीव एवं पाकिस्तान के बंदरगाहों पर उपयोग करना चाहता है। भारत के लिए यह संतोष का विषय है कि श्रीलंका अब चीन को यह मौका नहीं दे रहा है। श्रीलंका के विदेश मंत्री अली साबरी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि श्रीलंका भारत को खतरे में डाल कर चीन से रिश्ता नहीं बढ़ाएगा। इसका स्पष्ट यह है कि श्रीलंका अपने हंबनटोटा बंदरगाह को चीन के सामरिक हितों के लिए इस्तेमाल नहीं होने देगा। मालदीव और पाकिस्तान फिलहाल चीन का मोहरा बने हुए हैं। भारत ने इसके जवाब में चीन के पड़ोसी देश फिलिपींस और वियतनाम की सेना को मजबूत करना शुरू किया है। भारत ने फिलिपींस को क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस की आपूर्ति की है जिसका फिलहाल चीन के पास कोई जवाब नहीं है। अभी भारत के तीन युद्धपोत दक्षिण चीन सागर में फिलिपींस के तट पर तैनात हैं।
भारत के फिलिपींस के एक बंदरगाह के संचालन का जिम्मा भी लेना चाहता है। चीन मालदीव में अपने जासूसी जहाज को भेज कर भारत की सैन्य गतिविधियों की जानकारी लेता रहता है। अगर फिलिपींस के बंदरगाह भारत के कब्जे में आता है तो इससे चीन की गतिविधितियों पर नजर रखी जा सकेगा। लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक चीन से सटी सीमा पर दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के सामने डट कर खड़ी हैं। भारत चीनी सीमा पर विमानों, टैंकों एवं दूसरे मिसाइलों को तैनात कर रखा है। चीन की नौसेना दुनिया की मजबूत नौसेना है। यही कारण है कि भारत अपनी नौसेना को मजबूत करने पर विशेष जोर दे रहा है। ताइवान भी चीन के लिए सिर दर्द बना हुआ है। चीन की आक्रामकता से बचने के लिए ताइवान भी अपनी सेना के तीनों अंगों को मजबूत कर रहा है।
इसके अलावा भारत क्वाड के माध्यम से चीन को घेरने के लिए हरसंभव कोशिश कर रहा है। भारत के पड़ोसी देशों जापान, सिंगापुर, इंडोनेशिया, मलेशिया के साथ भी भारत की नजदीकी काफी बढ़ रही है। हिन्द महासागर के जवाब में भारत अब दक्षिण चीन सागर में अपनी उपस्थिति बढ़ा रहा है। अगर चीन पर दबाव बनाना है तो भारत को सामरिक दृष्टि से सेना के तीनों अंगों को मजबूत करना होगा। थियेटर कमान का गठन भारत की इसी रणनीति का एक हिस्सा है। भारत के सीडीएस अनिल चौहान ने हाल ही में कहा है कि थिएटर कमान पर तेजी से काम चल रहा है।