भगवान शिवजी ही एकमात्र ऐसे देवता हैं जिन्हें तैंतीस कोटि देवी-देवताओं में देवाधिदेव महादेव माना गया है। भगवान शिवजी की विशेष कृपा-प्राप्ति के लिए शिवपुराण में विविध व्रतों का उल्लेख है, जिसमें प्रदोष एवं शिवरात्रि व्रत प्रमुख हैं। प्रदोष व्रत से जीवन में सुख-समृद्धि खुशहाली मिलती है, साथ ही जीवन के समस्त दोषों का शमन भी होता है। प्रत्येक माह के दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि जो प्रदोष बेला में मिलती हो, उसी दिन प्रदोष व्रत रखा जाता है। सूर्यास्त और रात्रि के सन्धिकाल को प्रदोषकाल माना जाता है।
प्रदोषकाल का समय सूर्यास्त से 48 मिनट या 72 मिनट तक माना गया है, इसी अवधि में भगवान् शिवजी की पूजा प्रारम्भ करने का विधान है। प्रख्यात ज्योतिषविद् विमल जैन ने बताया कि इस बार यह प्रदोष व्रत 20 मई, सोमवार को रखा जाएगा। वैशाख शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 20 मई, सोमवार को दिन में 3 बजकर 59 मिनट पर लगेगी जो कि अगले दिन 21 मई, मंगलवार की सायं 5 बजकर 40 मिनट तक रहेगी। चित्रा नक्षत्र 20 मई, सोमवार सम्पूर्ण दिन रहेगा। सोमवार भगवान शिवजी का दिन है, इसलिए सोम प्रदोष व्रत अत्यन्त शुभ फलदाई हो गया है।
ऐसे रखें प्रदोष व्रत : ज्योतिषविद् ने बताया कि व्रतकर्ता को प्रात:काल ब्रह्ममुहूर्त में उठकर समस्त दैनिक कृत्यों से निवृत्त हो स्वच्छ वस्ïत्र धारण करना चाहिए। अपने आराध्य देवी-देवता की पूजा-अर्चना के पश्चात् अपने दाहिने हाथ में जल, पुष्प, फल, गंध व कुश लेकर प्रदोष व्रत का संकल्प लेना चाहिए। दिनभर निराहार रहकर सायंकाल पुन: स्नान करके प्रदोष काल में भगवान शिवजी की विधि-विधान पूर्वक पंचोपचार, दशोपचार अथवा षोडशोपचार पूजा-अर्चना करनी चाहिए। भगवान शिवजी का अभिषेक करके उन्हें वस्त्र, यज्ञोपवीत, आभूषण, सुगन्धित द्रव्य के साथ बेलपत्र, कनेर, धतूरा, मदार, ऋतुपुष्प, नैवेद्य आदि अर्पित करके धूप-दीप के साथ पूजा-अर्चना करनी चाहिए।
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