इस दुनिया में कौन सुरक्षित है? यह एक ऐसा सवाल है, जो प्रांतीय या राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं,बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पूछा जा रहा है। यह सवाल क्यों पूछा जा रहा है, इसकी कई वजहें हैं। कारण कि आज कोई सुरक्षित नहीं है और किसी को अपनी सुरक्षा का मद या घमंड है तो उसे इससे बाहर आ जाना चाहिए कि आज के वातावरण में कोई भी सुरक्षित नहीं है। हाल ही में आप की सांसद स्वाति मालीवाल को सीएम आवास में पीटे जाने की खबर आई। मालीवाल ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के पीए पर उनके साथ मारपीट करने के आरोप लगाए हैं। सवाल उठ रहे हैं कि क्या अब देश में महिला सांसदों को भी खतरा है? स्वाति मालीवाल राज्यसभा की सदस्य हैं और उन पर हमला सांसद के विशेषाधिकार के हनन का मामला भी है ।
दिल्ली में मुख्यमंत्री आवास पर स्वाति मालीवाल के साथ मारपीट की खबर सामने आने के तीन दिन बाद मालीवाल ने वृहस्पतिवार को इस मामले पर चुप्पी तोड़ी। पहले उन्होंने दिल्ली पुलिस को इस मामले में अपना बयान दिया, जिसके कुछ घंटों बाद पुलिस ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के निजी सचिव बिभव कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक कुमार के खिलाफ एफआईआर आईपीसी की धाराओं 354 (स्त्री की लज्जा भंग करने के आशय से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग), 506 (आपराधिक धमकी), 509 (अभद्र भाषा का प्रयोग कर किसी महिला के सम्मान को ठेस पहुंचाने की कोशिश) और 323 (जानबूझकर चोट पहुंचाना) के तहत दर्ज की गई है। गुरुवार शाम को मालीवाल की शारीरिक जांच के लिए उन्हें एम्स अस्पताल ले जाया गया। उन्होंने अभी तक अपने आरोपों के बारे में विस्तृत सार्वजनिक बयान नहीं दिया है, लेकिन उन्होंने एक्स पर लिखा कि उनके साथ बहुत बुरा हुआ।
उन्होंने पुलिस को बयान दे दिया है और वो आशा कर रही हैं कि इस मामले में उचित कार्रवाई होगी। जिन लोगों ने कैरेक्टर असेसिनेशन करने की कोशिश की, ये बोला कि दूसरी पार्टी के इशारे पर कर रही है, भगवान उन्हें भी खुश रखे। बीजेपी वालों से खास गुजारिश है कि इस घटना पर राजनीति न करें। सोमवार 13 मई को कई मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि मालीवाल रविवार शाम मुख्यमंत्री आवास गई थीं और वहां पर कुमार ने उनके साथ अभद्र व्यवहार और मारपीट की। रिपोर्टों के मुताबिक मालीवाल ने वहीं से पुलिस को फोन किया और वहां आने के लिए कहा, लेकिन जब पुलिस वहां पहुंची तो मालीवाल वहां नहीं थीं। बाद में मालीवाल खुद सिविल लाइंस थाने भी गईं, लेकिन कोई रिपोर्ट नहीं लिखवाई और वहां से चली गईं।
मंगलवार को आप के सांसद संजय सिंह ने एक प्रेस वार्ता आयोजित कर यह माना कि कुमाप ने मालीवाल के साथ अभद्रता की थी और मुख्यमंत्री ने कुमार के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा है, लेकिन अगले दिन जब केजरीवाल और संजय सिंह सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मिलने लखनऊ गए तो वहां कुमार को केजरीवाल के साथ देखा गया। प्रेस वार्ता के दौरान केजरीवाल और सिंह से इस संबंध में सवाल भी किए गए, लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया। दिल्ली की राजनीति के जानकार इस पूरे प्रकरण को आप की अंदरूनी कलह के नतीजे के रूप में देख रहे हैं। लेकिन इस मामले में राजनीति के अलावा बड़ा सवाल महिला सुरक्षा का भी है। मुख्यमंत्री आवास में किसी महिला और वो भी सांसद के साथ मारपीट होना अपने आप में चिंताजनक मामला है। केजरीवाल, मालीवाल और कुमार, तीनों पुराने साथी हैं।
राजनीति में आने से पहले जब केजरीवाल एक आरटीआई कार्यकर्ता थे, तब मालीवाल और कुमार उनके साथ उनके एनजीओ परिवर्तन और पीसीआरएफ के लिए काम करते थे। आप में आज भी ऐसे लोग हैं जो उस जमाने से केजरीवाल के साथी हैं। लोकपाल आंदोलन के बाद जब एक राजनीतिक पार्टी बनाने का फैसला लिया गया तो उस समय मालीवाल इस फैसले से सहमत नहीं थीं। वो राजनीति से बाहर रहना चाहती थीं और वो बाहर रहीं भी। जुलाई 2015 में उन्हें दिल्ली सरकार ने दिल्ली महिला आयोग का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया। बाद में उन्हें इसी पद पर एक और कार्यकाल के लिए नियुक्त किया गया, लेकिन जनवरी, 2024 में पार्टी द्वारा उन्हें राज्यसभा के लिए मनोनीत किए जाने के बाद उन्होंने आयोग से इस्तीफा दे दिया और सांसद बन गईं। दिल्ली की आबकारी नीति में कथित अनियमितताओं के मामले में केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद यह सवाल उठे कि मालीवाल और पार्टी के एक और सांसद राघव चड्ढा मुखर रूप से केजरीवाल की रिहाई की मांग करते हुए नजर क्यों नहीं आ रहे हैं।