पूर्वांचल प्रहरी डेस्क संवाददाता गुवाहाटी : मतदान बढ़ने को लेकर देश का चुनाव आयोग अब संदेह के घेरे में है। चार चरणों के मतदान के बाद ईवीएम मशीनों में वोटों की संख्या रातों-रात बढ़ती दिख रही है। चार चरणों की वोटिंग खत्म होने के बाद देशभर में 1.07 करोड़ से ज्यादा वोटों की बढ़ोतरी पर रहस्य बरकरार है। गौरतलब है कि अब तक 379 लोकसभा क्षेत्रों में मतदान हो चुका है। चुनाव आयोग ने अंतिम मतदान प्रतिशत बहुत देर से जारी किया जिसको लेकर आम जनता में भी संशय है। तदनुसार, मतदान की समाप्ति के बाद देश में अदृश्य मतदान की दर आंध्र प्रदेश और असम में सबसे अधिक है। आंध्र प्रदेश में रातों-रात सबसे ज्यादा 17.2 लाख वोटों की बढ़ोतरी देखी गई, जबकि असम में सबसे ज्यादा 10.3 लाख वोटों की बढ़ोतरी देखी गई। राष्ट्रीय अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की एक समीक्षा में यह एक भयानक तथ्य सामने आया है। गौरतलब है कि चुनाव आयोग समय पर अंतिम मतदान की घोषणा करने में विफल रहा। इसके अलावा वोट दर बढऩे को लेकर जागरूक लोगों और विपक्ष में भी संशय है। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने 19 मई को पहले चरण के मतदान के 11 दिन बाद अंतिम मतदान परिणाम जारी किए।
स्वाभाविक रूप से यह हर किसी को आश्चर्यचकित करता है। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने पहले चरण के मतदान के दिन डाले गए वोटों के जो प्रतिशत की घोषणा की थी इसके 11 दिन बाद अचानक मतदान प्रतिशत 5.75 प्रतिशत बढ़ गया। उसी प्रकार 30 अप्रैल को हुए दूसरे चरण में 60.96 प्रतिशत मतदान हुआ लेकिन 4 दिनों के बाद चुनाव आयोग ने 66.7 प्रतिशत वोट की सूचना दी। गौरतलब है कि पिछले चुनावों में अंतिम मतदान दर में 1-2 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी, लेकिन चुनाव आयोग ने इसे अगले दिन सार्वजनिक कर दिया था। हालांकि, इस बार चुनाव के पहले दो चरणों में मतदान प्रतिशत पर आयोग के आंकड़ों में अंतर का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा है कि वह 48 घंटे के भीतर मतदान का अंतिम डेटा क्यों नहीं दे सकता। सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले के बीच राष्ट्रीय मीडिया की पड़ताल में पता चला है कि चार चरणों में देश की 379 सीटों पर मतदान संपन्न होने के बाद ईवीएम पर 1.07 करोड़ वोट बढ़े।
भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने मतदान संपन्न होने के 11 दिन बाद पहले चरण के मतदान के अंतिम आधिकारिक आंकड़े जारी कर दिए हैं। इसी तरह दूसरे, तीसरे और चौथे चरण के मतदान के 4 दिन बाद अंतिम मतदान की आंकड़ों की घोषणा की गई। मतदान के दिन के बाद चुनाव आयोग द्वारा घोषित निर्वाचन क्षेत्र-वार मतदान और बाद में घोषित अंतिम मतदान के बीच भारी अंतर देखा गया है। चार चरणों के मतदान के बाद चुनाव आयोग ने घोषणा की थी कि देश में 44 करोड़ 9 लाख मतदाताओं ने मतदान किया था। हालांकि, चुनाव आयोग द्वारा प्रकाशित अंतिम सूची से पता चला है कि 45 करोड़ 16 लाख मतदाताओं ने अपना मत डाला है जो पिछले आंकड़ों से 1 करोड़ 7 लाख अधिक वोट दिखाया गया है। चार चरणों में आंध्र प्रदेश में सबसे ज्यादा 4.2 प्रतिशत यानी 17.2 लाख वोट बढ़े।
वोट वृद्धि में दूसरे नंबर पर रहे महाराष्ट्र में 16.7 लाख वोट और तीसरे स्थान पर रहे केरल में 11.4 लाख वोटों की बढ़ोतरी हुई। वहीं दूसरी ओर असम में तीन चरणों में कुल 10.3 लाख वोट बढ़े हैं। चुनाव आयोग ने मतदान की रात तक मतदाताओं की संख्या 1.89 करोड़ होने की घोषणा की थी लेकिन इसके विपरीत अंतिम सूची में 1.99 करोड़ मतदाता दर्शाए गए हैं। असम में मतदान प्रतिशत 77.4 प्रतिशत से बढ़कर 81.6 प्रतिशत हो गया है। भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) के आंकड़ों के अनुसार असम के 14 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों में से प्रत्येक में औसतन 73,000 अदृश्य मतदाताओं ने अपने मत डाले। गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने अभी तक प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में मतदान करने वाले मतदाताओं की संख्या की घोषणा नहीं की है।