नई दिल्ली :  देश में इन दिनों चुनावी मौसम चल रहा है। अब तक चार चरणों के दौरान कई प्रदेशों में मतदान हो गए हैं और अभी आगे कई राज्यों में कराए जाने हैं। लोकसभा चुनाव के पांचवें चरण में 20 मई को होने वाले मतदान से पहले राजनीतिक दलों ने अपना प्रचार अभियान तेज कर दिया है। वोटरों को लामबंद करने के लिए विभिन्न राजनैतिक दलों के नेता अलग-अलग राज्यों का दौरा कर रहे हैं और विरोधियों के खिलाफ बयानबाजी का दौर जारी है। वहीं इसी बीच उच्चतम न्यायालय ने एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) की उस याचिका पर शुक्रवार को निर्वाचन आयोग से एक हफ्ते के अंदर जवाब मांगा, जिसमें लोकसभा चुनाव के प्रत्येक चरण का मतदान संपन्न होने के 48 घंटे के अंदर मतदान केंद्रवार मत प्रतिशत के आंकड़े आयोग की वेबसाइट पर अपलोड करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) डी.वाई. चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ इस मुद्दे पर गैर सरकारी संगठन एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉम्र्स (एडीआर) की याचिका पर सुनवाई के लिए शाम साढ़े छह बजे बैठी। सीजेआई ने कहा कि निर्वाचन आयोग को याचिका पर जवाब देने के लिए कुछ उचित समय दिया जाना चाहिए और इसे सात चरण के लोकसभा चुनाव के छठे चरण से एक दिन पहले 24 मई को ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान एक उचित पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। इससे पहले दिन में, वकील प्रशांत भूषण ने एनजीओ की ओर से मामले का उल्लेख किया और याचिका को  तत्काल सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया। पिछले हफ्ते एनजीओ ने अपनी 2019 की जनहित याचिका में एक अंतरिम आवेदन दायर किया, जिसमें उसने निर्वाचन आयोग को यह निर्देश देने की अपील की कि सभी मतदान केंद्रों के 'फॉर्म 17 सी भाग-प्रथम (रिकॉर्ड किए गए मत) की स्कैन की गई पढऩे योग्य प्रतियांÓ मतदान के तुरंत बाद अपलोड की जाएं।