पूर्वांचल प्रहरी डेस्क संवाददाता गुवाहाटी : लोकसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लागू रहते नरेंद्र मोदी सरकार ने विवादास्पद नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के तहत 300 विदेशियों को नागरिकता प्रदान की है। बुधवार को केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला और खुफिया प्रमुख तपन डेका ने पहले 14 विदेशियों को आधिकारिक तौर पर उनके भारतीय नागरिकता प्रमाण पत्र सौंपे। उसके बाद पश्चिम बंगाल के शेष 20 लोकसभा क्षेत्रों में वोट पाने की आशा में 300 हिंदू विदेशियों को तुरंत नागरिकता प्रदान करने और इसके समानांतर असम में भी बेहद गुपचुप तरीके से बांग्लादेशियों को सीएए के जरिए नागरिकता देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। असम के लोगों की आशंकाओं को सही साबित करते हुए मोदी सरकार पहले ही हिंदू बांग्लादेशियों को नागरिकता देने का निर्देश जारी कर चुकी है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के विदेश प्रभाग (नागरिकता शाखा) के नागरिकता निदेशक आरडी मीना ने असम सरकार को सीएए के माध्यम से नागरिकता प्रदान करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया है। 12 मार्च को असम सरकार को भेजे गए पत्र में सरकार से विदेशी आवेदकों की जानकारी को सत्यापित करने के लिए जिला स्तरीय समितियां और राज्य स्तरीय समितियां बनाने के लिए भी कहा गया है। पत्र में यह भी कहा गया है कि नागरिकता अधिनियम,1955 की धारा 63 के तहत, जिला आयुक्त द्वारा नामित एक सिविल सेवा अधिकारी को जिला स्तरीय समिति में नियुक्त किया जाना चाहिए। असम सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा भेजे गए विशेष पत्र की प्राप्ति की बात स्वीकार की है, लेकिन यह ज्ञात नहीं है कि सरकार ने केंद्र के निर्देशानुसार विदेशी आवेदकों के डेटा की जांच के लिए जिला स्तरीय और राज्य स्तरीय समितियों का गठन किया है या नहीं। असम सरकार ने गृह मंत्रालय के इस पत्र की बात को इतने समय तक गुप्त रखा।
हालांकि, पत्र पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए गृह विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि राज्य सरकार केंद्र सरकार के किसी भी निर्देश का पालन करने को बाध्य है। दूसरे शब्दों में राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार अब केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार के निर्देशानुसार सीएए के माध्यम से किसी भी समय असम में बांग्लादेशियों को नागरिकता प्रदान करना सुनिश्चित कर रही है। गौरतलब है कि गृह मंत्रालय ने बुधवार को जानकारी दी थी कि 300 विदेशियों को नागरिकता के लिए चुना गया है और ऑनलाइन पोर्टल में अन्य 2,500 आवेदकों के नागरिकता आवेदन विचाराधीन हैं। हालांकि, यह ज्ञात नहीं है कि इनमें से कोई भी आवेदक असम का हिंदू बांग्लादेशी है या नहीं। लेकिन इससे पहले मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने एक चुनाव अभियान में घोषणा की थी कि बराक के एक व्यक्ति ने सीएए के माध्यम से नागरिकता के लिए आवेदन किया था।
गौरतलब है कि जिन लोगों ने ऑनलाइन पोर्टल पर नागरिकता के लिए आवेदन किया है, दूसरों के लिए उनका विवरण जानने का कोई उपाय नहीं है। इसलिए हिमंत विश्व शर्मा के बयान पर प्रतिक्रियाएं आई थीं। अब केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा असम सरकार को बांग्लादेशियों को नागरिकता देने के लिए जिला और राज्य स्तरीय समितियां बनाने का निर्देश देने के बाद बांग्लादेशियों के लिए नागरिकता प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। उल्लेखनीय है कि मोदी सरकार ने लोकसभा चुनाव की अधिसूचना से पहले 11 मार्च को नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) लागू करने की जल्दबाजी की। भाजपा सरकार के इस कार्य के खिलाफ असम में कई जातीय समूहों द्वारा कुछ विरोध प्रदर्शन भी हुए।
हालांकि, संसद में नागरिकता विधेयक के पारित होने के दौरान हुए विरोध प्रदर्शनों की तरह इस बार अधिकांश दलों और संगठनों ने अज्ञात कारणों से बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन से परहेज किया। लेकिन कई संगठन और विपक्षी राजनीतिक नेता सीएए के प्रारूपण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अभी तक नियमों के प्रारूपण पर कोई रोक नहीं लगाई है और इसका मौका उठाकर सरकार ने बंगाल चुनाव में हिंदू बंगाली वोटों के हित में नागरिकता देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस बीच, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने असम सरकार को सीएए के माध्यम से विदेशी नागरिकता के लिए प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है। इसलिए लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद असम में विदेशियों के देशीकरण का सिलसिला शुरू होना तय है।