पूर्वांचल प्रहरी डेस्क संवाददाता गुवाहाटी : सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के तहत हाथ में अनंत शक्ति लेकर रेस के घोड़े की तरह चल रहे प्रवर्तन निदेशालय की लगाम कड़ी कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक बेहद अहम फैसला सुनाया जिसके अनुसार अब से ईडी विशेष न्यायालय में लंबित मुकदमें के आरोपियों को पीएमएलए या अवैध वित्तीय लेनदेन रोकथाम अधिनियम के तहत गिरफ्तार नहीं कर सकेगी। गौरतलब है कि अब तक, ईडी आरोपियों को केवल शिकायत के आधार पर पीएमएलए की धारा 19 (वित्तीय अनियमितताओं) के तहत अदालत की अनुमति के बिना गिरफ्तार कर रहा था। लेकिन अब से अगर ईडी पीएमएलए में किसी विशेष अदालत में आरोपी किसी व्यक्ति को हिरासत में लेना या गिरफ्तार करना चाहता है, तो उसे संबंधित विशेष अदालत में आवेदन करना होगा। आवेदन स्वीकार होने पर ही ईडी आरोपी को हिरासत में ले सकती है या गिरफ्तार कर सकती है। ईडी की शक्तियां कम करने का सुप्रीम कोर्ट का फैसला कई मायनों में अहम है।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला देश भर में उन आरोपों के बीच आया है कि नरेंद्र मोदी सरकार विपक्षी राजनेताओं को वश में करने के लिए ईडी जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है। सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले में इसमें असम का नाम भी शामिल है। क्योंकि फैसला बेंच के दो न्यायाधीशों में से एक असम के उज्ज्वल भुइयां हैं। पीठ के दूसरे न्यायाधीश अभय एस ओका हैं। पीठ ने अपने फैसले में कहा कि अगर कोई आरोपी समन के जवाब में अदालत में पेश होता है, तो ईडी को उसकी गिरफ्तारी के लिए संबंधित अदालत में आवेदन करना होगा। समन पर पेश होने वाले किसी आरोपी को ईडी कोर्ट की इजाजत के बिना गिरफ्तार नहीं कर सकती। इसके अलावा, अगर पीएमएलए मामले में आरोपी समन के अनुसार अदालत में पेश होता है तो उसे अलग से जमानत के लिए आवेदन करने की जरूरत नहीं है। पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि पीएमएलए की धारा 45 की दोहरी शर्त इस मामले में लागू नहीं होगी।
गौरतलब है कि इन दोहरी शर्तों में से पहली शर्त है, जब पीएमएलए मामले में आरोपी जमानत के लिए अदालत में आवेदन करता है, तो सरकार को सुनवाई के लिए सबसे पहले वकील की सहमति की आवश्यकता होती है। दूसरी शर्त के अनुसार जमानत तभी दी जा सकती है जब सरकारी वकील आश्वस्त हो कि आरोपी दोषी नहीं हो सकता है और रिहा होने पर उसके समान अपराध करने की संभावना नहीं है। देखा जाता है कि लगभग सभी मामलों में सरकारी अधिवक्त इन दो शर्तों का उल्लंघन करते हैं।
मुख्य रूप से ईडी द्वारा अनुशंसित सरकारी अधिवक्ता को ये दोनों शर्तें मंजूर नहीं होता। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ईडी की वह अतिरिक्त शक्ति विलोप हो गई है। संशोधित पीएमएलए में मोदी सरकार चाहे तो एक्ट के तहत ईडी के हाथों गिरफ्तारी, तलाशी, समन जारी करना आदि कर सकती थी। शिकायत आई थी कि मोदी सरकार वह शक्ति सौंप कर राजनीतिक उद्देश्यों के लिए ईडी के खुले इस्तेमाल कर रही थी। गौरतलब है कि ईडी की विशेष शक्तियों के खिलाफ मामला अभी भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। लेकिन इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को ईडी की कई विशेष शक्तियों में कटौती कर दी।