सूचना क्रांति के युग में पत्रकारिता के सामने कठिन चुनौतियां हैं। आज की पत्रकारिता विश्वसनीयता की कसौटी के दौर से गुजर रही है। निष्पक्ष पत्रकारिया के द्वारा विश्वसनीयता की साख को बचाए रखना हर पत्रकार की जिम्मेवारी है। नकारात्मक मानसिकता के दौर से गुजर रहे समाज तथा देश को सही रास्ता दिखाना तथा सही तस्वीर पेश करना लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की जिम्मेदारी है। सोशल मीडिया के दौर में भी प्रिंट मीडिया की अहमियत अभी भी कम नहीं है। हिंदी पत्रकारिता ने स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर हर संकट के समय आगे बढ़कर देशवासियों का मार्ग दर्शन किया एवं हौसला बढ़ाया है।
पिछले साढ़े तीन दशकों में पूर्वोत्तर में भी हिंदी पत्रकारिता बाल्य अवस्था से युवा अवस्था में पहुंच गई है, जिसका श्रेय पूर्वांचल प्रहरी को जाता है। पूर्वोत्तर में हिंदी पत्रकारिता पूर्वांचल प्रहरी से शुरू होती है। जब भी यहां की हिंदी पत्रकारिता का इतिहास लिखा जाएगा उसमें पूर्वांचल प्रहरी के संस्थापक संपादक स्वर्गीय जीएल अग्रवाला का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। जिस वक्त किसी ने पूर्वोत्तर से हिंदी समाचार पत्रों के प्रकाशन की कल्पना तक न की होगी, उस वक्त जीएल अग्रवाला ने यह कारनामा कर दिखाया। 16 मई, 1989 का दिन पूर्वोत्तर की मुख्यधारा की हिंदी पत्रकारिता के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा, क्योंकि इसी दिन पूर्वोत्तर के प्रथम हिंदी दैनिक पूर्वांचल प्रहरी का प्रकाशन शुरू हुआ था। असम से हिंदी अखबार के प्रकाशन से यहां के हिंदीभाषियों को अपने विचार रखने के लिए एक सशक्त मंच मिला। इससे पहले हिंदीभाषियों की आवाज सुनने वाला कोई नहीं था। पूर्वांचल प्रहरी के प्रकाशन से हिंदी के लेखकों, कवियों और कहानीकारों आदि को एक सुनहरा मौका मिला। स्वर्गीय जीएल अग्रवाला के अथक परिश्रम का फल है कि असम के विकास में उनके योगदान को हर असमवासी स्वीकार कर रहा है। असम के हर क्षेत्र के लोगों के बीच जीएल अग्रवाला की लोकप्रियता थी। राजकीय सम्मान के साथ स्वर्गीय जीएल अग्रवाला का अंतिम संस्कार हो या असम साहित्य सभा द्वारा सम्मान देने की बात हो, यह दर्शाता है कि उनकी असमिया समाज के बीच कितनी अहमियत थी।
डिजिटल मीडिया के युग में प्रिंट मीडिया चुनौती के दौर से गुजर रही है। खासकर कोरोना काल के वक्त तो प्रिंट मीडिया अपने अस्तित्व को बचाने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा, लेकिन आज भी प्रिंट मीडिया की अपनी अहमियत है। लेकिन पूंजीवाद युग में नकारात्मक पत्रकारिता से मीडिया की साख पर सवाल उठ रहे हैं। नेताओं के हेट स्पीच लोकतंत्र की गरिमा को कलंकित कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में लोकतंत्र के चौथे स्तंभ मीडिया को आगे आकर सामाजिक मूल्यों के पतन को रोकने के लिए लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। पत्रकारों को समाजहित व विकास को मुख्य उद्देश्य मानकर फेक न्यूज व हेट न्यूज से बचना चाहिए। मीडिया को नकारात्मक पत्रकारिता के जाल में फंसने के बजाए स्वस्थ पत्रकारिता करनी चाहिए। सोशल मीडिया से आ रही खबरें समाज को भ्रमित कर रही हैं। अब मीडिया की जिम्मेवारी है कि ऐसी खबरों की सत्यता के प्रति समाज के सामने सही तस्वीर पेश करें। मूल्य आधारित पत्रकारिता से किसी भी चुनौती का सामना किया जा सकता है। मीडिया का जितना अधिकार आलोचना करना है, उतना ही दायित्व सकारात्मक खबरों को सामने लाने का है। पूर्वांचल प्रहरी ने अपने इसी दायित्व का पालन करते हुए निर्भीकता के साथ ज्वलंत मुद्दों को उठाया है तथा असमिया एवं हिंदीभाषी समाज के बीच समन्वय का काम किया है। पूर्वोत्तर में हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार में पूर्वांचल प्रहरी की महती भूमिका रही है। यही कारण है कि पूर्वांचल प्रहरी पिछले 35 वर्षों से पूर्वोत्तर के हिंदी पाठकों की पहली पसंद बना हुआ है। पूर्वोत्तर के हिंदी पत्रकारिता के लौह पुरुष स्वर्गीय जीएल अग्रवाला ने निडरता के साथ पत्रकारिता करने का जो रास्ता दिखाया था, पूर्वांचल प्रहरी उसी मार्ग पर आगे बढ़ते हुए कलम के सिपाही की मजबूती से भूमिका का निर्वाह कर रहा है। पूर्वांचल प्रहरी की 35वंीं वर्षगांठ पर हमारे सभी पाठकों, विज्ञापनदाताओं, एजेंटों, हॉकरों, शुभचिंतकों को पूर्वांचल प्रहरी की तरफ से हार्दिक बधाई। हमें पूरा विश्वास है कि भविष्य में भी पूर्वांचल प्रहरी को आपका पूरा प्यार मिलता रहेगा।