हिन्दू सनातन धर्म में ब्रह्म मुहूर्त का बड़ा महत्व है। इसका जिक्र बार-बार होता है। धार्मिक कार्यों, जप-तप के लिए यही श्रेष्ठ समय बताया गया है। लेकिन ये ब्रह्म मुहूर्त आखिर है क्या। इसका समय क्या होता है। इस खबर में ज्योतिषाचार्य विस्तार से बता रहे हैं।
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक ब्रह्म मुहूर्त का विशेष महत्व होता है। ब्रह्म मुहूर्त यानि सूर्योदय का समय। कहा जाता है इस वक्त खुद देवता धरती पर आते हैं। इस ब्रह्म मुहूर्त में क्या करना चाहिए और क्या नहीं इसके क्या फायदे और क्या नुकसान हो सकते हैं इस बारे में ज्योतिषाचार्य डॉ.कुणाल कुमार झा विस्तार से बता रहे हैं। डॉ. झा कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर ज्योतिष विभाग के विभागाध्यक्ष हैं।
कब से कब तक होता है ब्रह्म मुहूर्त : डॉ. कुणाल कुमार झा के मुताबिक ब्रह्म मुहूर्त ईश्वरीय और आध्यात्मिक सत्ता का भेदन और उनकी आराधना करने के लिए रखा गया है। उस समय केवल ईश्वर की चिंता करनी चाहिए उसकी आराधना करनी चाहिए। इसमें ज्योतिष शास्त्र के अनुसार प्रात: कालीन संध्या का जो निर्णय किया गया है उसमें ढाई घटी बराबर एक घंटा होता है। सूर्योदय से 2 घंटा पूर्व और सूर्योदय के 2 घंटा बाद तक जो समय है वो ब्रह्म मुहूर्त है। प्रात: कालीन संध्या का यही समय है। खासकर सूर्योदय से 2 घंटा पूर्व जो पांच घटी समय है उसे ब्रह्म मुहूर्त कहा गया है।
ब्रह्म मुहूर्त में जप तप का महत्व : ब्रह्म मुहूर्त में प्रात:कालीन स्नान, जप और आराधना, यज्ञ कर्म यह सब ब्रह्म तत्व का भेदन करने में सहायक होता है। ब्रह्म तत्व अर्थात ईश्वरी सत्ता के समकालीन जाने में उसकी सहायता करती है। उसकी राह प्रशस्त करती है। बताया जाता है ब्रह्म मुहूर्त में उठकर दैनिक क्रिया से निवृत हो कर पूजा, पाठ, जप, यज्ञ करने से शारीरिक और मानसिक दोनों क्षेत्र में प्रबलताएं होती हैं। इस ब्रह्म मुहूर्त में उठना और क्रियाकलाप करने का एक विशष महत्व माना गया है। यदि आपको भी चाहिए ईश्वरीय आशीर्वाद चाहिए तो ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पूजा, पाठ और जप कर सकते हैं।