पूर्वांचल प्रहरी डेस्क संवाददाता गुवाहाटी : मूल्य वृद्धि के कारण राज्य में शराब की बिक्री में 50 प्रतिशत की गिरावट आने के कारण दिसपुर चिंतित है। शराब की बिक्री घटने से आबकारी राजस्व भी घट रहा है। इसलिए आबकारी विभाग ने वाइन शॉप और बार मालिकों के लिए शराब की बिक्री बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित कर दिया है। हालांकि, राज्य सरकार ने ड्रग्स के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है, लेकिन शराब का प्रचलन बढ़ाने के लिए कोई उपाय नहीं छोड़ा है। एक तरफ सरकार राजस्व के लिए गांव-गांव में शराब की दुकान की लाइसेंस जारी करती है और दूसरी ओर नारकोटिक्स प्रिवेंशन काउंसिल के माध्यम से शराब रोकथाम जागरूकता कार्यक्रम चलाने की बेहद हास्यास्पद कार्यक्रम चला रहे हैं।
शराब की बोतलों पर नियम माफिक चेतावनियों की तरह राजनीतिक संस्थापन का केंद्र स्टेट काउंसिल फॉर ड्रग्स एंड नारकोटिक्स, कुछ सड़कों पर नुक्कड़ नाटक का प्रदर्शन और होर्डिंग लगा रहा है और शराब मुक्त असम के निर्माण का नारा दोहरा रहा है। गौरतलब है कि असम सरकार शराब से सालाना 4,000 करोड़ रुपए का आबकारी राजस्व इक करती है, लेकिन शराबियों की स्वास्थ्य सुरक्षा पर 1 करोड़ रुपए भी खर्च करती है। इसका मतलब यह है कि एक तरफ शराब की बिक्री की अनुमति देकर दूसरी तरफ राज्य नारकोटिक्स एंड ड्रग प्रिवेंशन काउंसिल द्वारा शराब विरोधी जागरूकता अभियान चला रही है।
गुवाहाटी में हातीगांव में एक किराए के मकान में चलने वाली ड्रग्स एंड नारकोटिक्स प्रिवेंशन काउंसिल ने गुवाहाटी में कई जगहों पर आओ एक नशा मुक्त समाज बनाएं के नारे के साथ होर्डिंग्स लगाए हैं। परिषद ने जागरूकता विज्ञापनों में नशा मुक्त समाज बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता को भी बढ़ावा दिया है। वे न केवल ड्रग फ्री असम के होर्डिंग्स लगा रहे हैं, बल्कि नुक्कड़ नाटक, कैलेंडर और डायरी भी प्रकाशित कर रहा है। स्वाभाविक रूप से, सरकार शराब की खपत की अनुमति देकर सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में नारकोटिक्स एंड ड्रग प्रिवेंशन काउंसिल की तरह नशा मुक्त असम को बढ़ावा देने में व्यस्त है। अफवाह यह भी है कि सरकार ने सांप भी मरे, लाठी भी न टूटे की नीति अपनाई है।