पिछले कुछ दिनों से पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में जनता ने पाकिस्तान सरकार के खिलाफ बगावत कर दी है। आसमान छूती महंगाई एवं सरकार की उपेक्षा के कारण पीओके की जनता अब भारत ङ्क्षजदाबाद के नारे लगा रही है। वहां की जनता अब भारत में शामिल होना चाहती है। पाकिस्तान की सरकार तथा वहां की सेना आंदोलन को दबाने के लिए वहां की जनता पर अत्याचार कर रही है। 11 मई को पीओके की जनता तमाम प्रतिबंधों के बावजूद सड़कों पर उतर आई, जिसे रोकने के लिए पाकिस्तान सरकार को धारा 144 लागू करना पड़ा।

पुलिस और जनता की भिड़ंत में एक पुलिस अधिकारी की मौत हो गई तथा सौ से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। वहां की जनता का कहना है कि महंगाई के कारण खाद्य सामग्री की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। जहां भारत में आटे की कीमत प्रति पांच किलो 250 से 300 रुपए के बीच है, वहीं पाकिस्तान में इसकी कीमत 8 हजार से 10 हजार रुपए के बीच हो गई है। पीओके में तो हालात और भी खराब हैं। आलू-प्याज, पेट्रोल आदि सभी वस्तुओं की कीमतें आसमान छू रही हैं। वहां की जनता सेना के अत्याचार से भी तंग आ चुकी है। जम्मू-कश्मीर में जबसे अनुच्छेद 370 हटाया गया है, तब से वहां विकास की रफ्तार तेज हो गई है। पीओके की जनता भारत के जम्मू-कश्मीर में विकास को देखकर भारत में आना चाहती है।

मालूम हो कि जम्मू-कश्मीर का बजट पीओके के बजट से 18 गुना ज्यादा है, जबकि शिक्षा का बजट भी 10 गुना ज्यादा है। कंगाली के दौर से गुजर रहे पाकिस्तान को अपने अस्तित्व को बचाने के लिए दूसरे देशों से भीख मांगनी पड़ रही है। विदेशी कर्ज के भुगतान के लिए अगले पांच वर्षों के दौरान पाकिस्तान को 123 अरब डॉलर की जरूरत होगी, जबकि यह देश दो-चार डॉलर के लिए आईएमएफ एवं अरब देशों के सामने झोली फैला रहा है। चुनाव प्रचार के दौरान भारत के गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ ङ्क्षसह एवं विदेश मंत्री जयशंकर ने पीओके पर जैसा बयान दिया है उससे भी पीओके की जनता की उम्मीदें भारत से बढ़ गई हैं। अमित शाह ने कहा है कि पीओके भारत का है और भारत इसे लेकर रहेगा।

रक्षा मंत्री राजनाथ ङ्क्षसह ने कहा है कि पीओके की जनता खुद भारत के साथ आने के लिए पाक सरकार को मजबूर कर देगी। जिस तरह दुनिया के देशों द्वारा पाकिस्तान की कश्मीर नीति को नकारा जा रहा है उससे भी वहां की जनता को थोड़ी आशा बंधी है। ऐसा कहा जा रहा है कि लोकसभा चुनाव के बाद भारत पीओके को अपनी ओर मिलाने के लिए कूटनीतिक एवं सामरिक पहल तेज करेगा। एक तरफ पाकिस्तान में खाने के लिए लाले पड़े हुए हैं तो दूसरी तरभ वहां के नेता अभी भी कश्मीर राग अलापने से बाज नहीं आ रहे हैं।

ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रइसी की पाकिस्तान यात्रा के दौरान भी वहां के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने कश्मीर राग अलापा था, ङ्क्षकतु रईसी ने इस पर कोई जवाब नहीं दिया। अब तो सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमिरात जैसे देश भी कश्मीर के मुद्दे पर चुप हो गए हैं। उन लोगों का कहना है कि पाकिस्तान भारत के साथ बैठकर इस समस्या का हल निकालें। भारत का स्पष्ट कहना है कि अब जो भी बात होगी वह पीओके पर होगी। पाकिस्तान से तभी वार्ता हो सकती है जब वह आतंकवाद को सहयोग देना बंद करे।

कश्मीर में चल रहे आतंकवाद के पीछे पाकिस्तानी सेना तथा आईएसआई का हाथ है। अफगानिस्तान की तरफ से भी पाकिस्तान को चुनौती मिल रही है। तहरीके तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ने पाकिस्तानी सेना एवं सरकार को बैकफुट पर ला दिया है। भारत सरकार को पीओके में उठ रहे बगावती आवाज को समर्थन देना चाहिए। पीओके भारत के लिए सामरिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। अगर पीओके भारत में शामिल हो जाता है तो भारत का रास्ता अफगानिस्तान, मध्यपूर्व एवं पश्चिमी एशिया के देशों के साथ खुल जाएगा।