पूर्वांचल प्रहरी डेस्क संवाददाता गुवाहाटी : एक ऐसी लड़की जिसने कम उम्र में ही घर का बोझ उठा लिया था उसने मंगलवार को घोषित हायर सेकेंडरी फाइनल परीक्षा में उत्तीर्ण हुई है। गरीबी से जूझ रहे अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए उसे ई-रिक्शा चलाना पड़ रहा है। इस छात्रा की पहचान नगांव शहर के पास माजपोतनी की गंगोत्री हजारिका के रूप में हुई। दुबली-पतली लड़की का दिमाग बहुत तेज है। पिता की विकलांगता के कारण गंगोत्री को रोजाना ई-रिक्शा चलाकर परिवार का गुजारा करना पड़ता है। हालांकि, लड़की ने इस बीच अपनी पढ़ाई जारी रखी।
वह रोजाना अपने घर से तीन किलोमीटर दूर उरियागांव के एक शिक्षण संस्थान में जाती है और पढ़ाई के बाद ई-रिक्शा चलाकर रोजी-रोटी के लिए ई-रिक्शा चलाती है। इस छात्रा ने मंगलवार को घोषित हायर सेकेंडरी फाइनल परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है। हालांकि, गंगोत्री अपने नतीजों से खुश नहीं हैं। क्योंकि उसका सपना अच्छा रिजल्ट लाने का था। लेकिन जबकि परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में व्यस्त रहने के कारण वह अपनी पढ़ाई में अधिक समय और ध्यान नहीं दे पाती थी।
गंगोत्री के पिता ने एक ई-रिक्शा खरीदा था और परिवार का भरण-पोषण करने के लिए उसे खुद चलाते थे। लेकिन वे अचानक बीमार पड़ गए और काम करने लायक न रहे। पिता के बीमार पडऩे के बाद गंगोत्री पिछले एक साल से ई-रिक्शा चला रही है। गंगोत्री, जो अपने घर के पास उरियागांव में पढ़ती थी, उसे अब नगांव शहर या ननै के एक कॉलेज में जाना होगा। गंगोत्री कॉलेज में पढ़ाई के बावजूद खाली समय में ई-रिक्शा चलाती रहेगी। गंगोत्री के परिवार में उनके बीमार पिता, मां और एक महिला हैं।