नगालैंड में सक्रिय विभिन्न भूमिगत संगठनों की अवैध वसूली, धमकी एवं प्रताड़ना से नगालैंड के व्यापारी परेशान हैं तथा दहशत के माहौल में काम कर रहे हैं। इसका नतीजा यह हुआ है कि इसका असर आम जनता पर पड़ रहा है। वहां की सरकार राजनीतिक हितों को देखते हुए इस मामले में आंख बंद की हुई है। अंत में बाध्य होकर नगा काउंसिल डिमापुर, डिमापुर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री तथा नगालैंड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के आह्वान पर वहां के व्यापारियों ने पिछले 26 से 28 अप्रैल तक अनिश्चितकालीन हड़ताल किया तथा अपनी-अपनी दुकानें बंद रखी। सरकार द्वारा इस मामले में कार्रवाई करने का लिखित आश्वासन मिलने के बाद 29 अप्रैल से व्यापारियों ने अपनी-अपनी दुकानें खोल दी।
नगालैंड पुलिस ने एक ऐप जारी किया है जिसके जरिए व्यापारी अपनी शिकायत पुलिस को कर सकते हैं। पुलिस का कहना है कि व्यापारी भूमिगत संगठनों के बारे में कोई शिकायत नहीं करते हैं, जबकि व्यापारियों का कहना है कि पुलिस थाने में रिपोर्ट के बाद उनकी पहचान उजागर हो जाती है, जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ता है। व्यापारियों का आरोप है कि भूमिगत संगठन के लोग दुकानों एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में आते हैं तथा वे नकली उत्पाद, मूल्यों में छेड़छाड़ तथा एक्सपायरी डेट के नाम पर व्यापारियों को धमकाते हैं। इससे बचने के लिए उनसे मोटी रकम देने की मांग करते हैं। भूमिगत संगठन के लोग व्यापारियों को अपने अड्डे पर बुलाते हैं, उनको प्रताड़ित करते हैं तथा मनमानी धन वसूलते हैं।
भूमिगत संगठनों की इस अवैध गतिविधियों से वहां का व्यवसायी वर्ग आतंकित है। सबसे चिंता की बात यह है कि अभी तक राज्य सरकार तमाशाबीन बनी हुई है। यह बात यहीं तक सीमित नहीं है। भूमिगत संगठन के लोग ड्रग्स एवं हथियारों की तस्करी में भी शामिल हैं। पुलिस एवं दूसरी सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई में अभी तक केवल बिचौलिये तथा निचले स्तर के लोग ही पकड़े गए हैं। रैकेट चलाने वाले सरगना की गिरफ्तारी नहीं हो पाती जिससे ड्रग्स एवं हथियार का धंधा बंद नहीं होता।
इन लोगों का नेटवर्क देश के बाहर तक फैला हुआ है। खासकर डिमापुर में भूमिगत संगठनों की समानांतर सरकार चल रही है। नगालैंड जाने वाले ट्रक चालकों का भी अपहरण कर उनसे मुंहमांगी रकम वसूली जाती है। इस कारण ट्रक वाले ज्यादा भाड़ा वसूलते हैं। कई बार असम की ओर से जाने वाले ट्रक चालकों ने नगालैंड जाने से इनकार कर दिया था। वहां के व्यापारी वर्ग के लिए भूमिगत संगठन बड़ी चुनौती बन चुके हैं। ऐसी स्थिति में सरकार को ऐसे तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।
पुलिस प्रशासन को भी मुस्तैद होने की जरुरत है। भूमिगत संगठन के लोगों के खिलाफ तभी कारगर कार्रवाई हो पाएगी जब राजनीतिज्ञों और प्रशासन की साठगांठ न हो। भूमिगत संगठनों की अवैध गतिविधियों पर हर हालत में अंकुश लगना चाहिए। सरकार और पुलिस प्रशासन के साथ वहां के नागरिक संगठनों को भी आगे आना होगा। इसके लिए सबको मिलकर प्रयास करना होगा।