बोकाजान : नगालैंड की वाणिज्यिक राजधानी डिमापुर में अवैध वसूली का कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। लगातार कई भूमिगत समूहों की ओर से हो रही जबरन वसूली और व्यापारियों पर उत्पीडऩ से परेशान होकर अब कंफेडरेशन ऑफ नगालैंड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (सीएनसीसीआई) ने अनिश्चकालीन हड़ताल के ऐलान कर दिया है। इस वजह से शुक्रवार और शनिवार को डिमापुर में सभी दुकानें और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान सहित पेट्रोल पंप बंद रहे। चैंबर्स ऑफ कॉमर्स द्वारा जारी एक प्रेस वार्ता में कहा गया है कि कई अंडरग्राउंड समूह अपने-अपने हिसाब से डिमापुर में अवैध वसूली करते रहे हैं, जिस वजह से कारोबार में काफी दिक्कत हो रही है। कारोबारियों पर कई तरह के टैक्स लगना, उन्हें धमकी देना, अगर जबरन वसूली का पैसा समय पर नहीं दिया जाए तो उन्हें तलब कर उनके साथ कई प्रकार के अत्याचार होने का दावा करते हुए कहा गया है कि अब इसका कोई अंत होता नहीं दिख रहा है। इन घटनाक्रम को देखते हुए विरोध के तौर पर इस बंद का निर्णय लिया गया है।
सीएनसीसीआई द्वारा आहूत बंद का खासा असर आज डिमापुर के व्यावसायिक प्रतिष्ठान के साथ व्यक्तिगत वाहन चालकों और अन्य सभी प्रकार के गाडिय़ों पर भी देखा गया। दो दिनों से जारी बंद के कारण नगालैंड के वाहन चालक तेल की किल्लत झेल रहे हैं। इस बीच डिमापुर से आज सुबह से ही हजारों की संख्या में गाडिय़ां पड़ोसी राज्य असम के बोकाजान पहुंचकर अपने गाड़ियों में तेल भरवा रहे हैं। बोकाजान के खटखटी सुखानजान, अमराजान स्थित सभी पेट्रोल पंपों में सुबह से गाडिय़ों की लंबी कतार देखी गई। यहां तक कि आज स्थानीय वाहन चालकों को भी पेट्रोल-डीजल नहीं मिला, जिसके कारण डिमापुर से आये हजारों की संख्या में गाडिय़ों के चलते लगभग सभी पेट्रोल पंपों में तेल की किल्लत देखने को मिली। दरअसल नगालैंड में अंडरग्राउंड समूहों द्वारा जबरन वसूली कोई नई बात नहीं है। इस राज्य में सालों से सभी वर्ग के लोग इससे पीडि़त रहे हैं। लेकिन केंद्र व राज्य सरकार को इस पर कोई ठोस कदम उठाते नहीं देखा गया, जिस वजह से जबरन वसूली का मामला इतना बढ़ गई है।
नगालैंड र्चंबर ऑफ कॉमर्स ने सरकार के इस रवैये पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा है कि जबरन वसूली को लेकर व्यापारिक सुमदाय का उत्पीड़न अब और बर्दास्त नहीं किया जाएगा। सरकार से अंडर ग्राउंड समूहों की निरंतर जबरन वसूली, धमकी और तलब को जल्द से जल्द रोकने पर ठोस कदम उठाने का आग्रह किया है। इसके विरोध में सीएनसीसीआई ने सभी बाजार, व्यापार संबंधी निजी कार्यालयों को बंद रखने का ऐलान किया था और डिमापुर के साथ नगालैंड के लगभग सभी जिलों में इस मुद्दे को लेकर काफी समर्थन मिल रहा है। हालांकि बैंक, शैक्षणिक संस्थान, सरकारी कार्यालय और अस्पतालों को इस बंद से बाहर रखा गया है। वही मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने भी गृह विभाग को कड़ा निर्देश जारी कर दिया है।
राज्य के गृह आयुक्त ने बताया कि नगालैंड सरकार इस बात पर पूरी तरह से नजर बनाई हुई है कि डिमापुर में कई अंडरग्राउंड समूह जबरन वसूली कर कारोबारियों को परेशान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जबरन वसूली करने वालों में अधिकतर गु्रप वे हैं, जिन्होंने सरकार के साथ युद्धविराम समझौता पर हस्ताक्षर किया है। मामले को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस को निर्देश दिया गया है कि वे सीजफायर के नियमों के किसी भी उल्लंघन की सूचना मोनिटरिंग गु्रप को दें, ताकि उचित कारवाई की जा सके। होम कमिश्नर ने यह भी कहा कि जो लोग इस प्रकार जबरन वसूली कर रहे हैं, उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
वहीं सुरक्षा के लिहाज से डिमापुर पुलिस कमिश्नर को बाजार में गश्त बढ़ाने और लोगो मे भरोसा काबिल करने के लिए आईआरबीएन के जवानों को तैनात करने के लिए कहा गया है। इसके अलावा नगालैंड सरकार ने इस तरह के जबरन वसूली की घटनाओं से निपटने के लिए एक विशेष सेल बनाने का भी निर्देश दिया है। ऐसे में अब डिमापुर चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री का कहना है कि जब तक सरकार मामले को लेकर संतोषजनक कदम नहीं उठाती, तब तक हड़ताल जारी रहेगी।