पूर्वांचल प्रहरी डेस्क संवाददाता गुवाहाटी : अरुणाचल में शरण ले रहे बांग्लादेशी चकमा-हाजोंग शरणार्थियों को असम में स्थापित करने के भाजपा के गुप्त एजेंडा को मीडिया के सामने सार्वजनिक करने के कारण केंद्रीय मंत्री किरेन रिजीजू से पार्टी नेतृत्व नाराज हो गया है और इसके बाद उन्हें अपना स्वर बदलने को मजबूर होना पड़ा। भाजपा के राष्ट्रीय नेता किरेन रिजीजू ने कहा था कि उन्होंने असम में चकमा-हाजोंग शरणार्थियों को नागरिकता देने की योजना पर मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा से बातचीत की है। लेकिन अब असम में लोगों के स्वत:स्फूर्त विरोध के बाद उन्होंने अपनी ही कही बात से इनकार कर दिया है। गौरतलब है कि 17 अप्रैल को अरुणाचल प्रदेश के ईटानगर में भाजपा के एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते समय केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय नेता किरेन रिजीजू ने यह स्पष्ट कर दिया था कि उन्होंने सीएए के माध्यम से चकमा-हाजोंग शरणार्थियों के असम में पुनर्वास और नागरिकता प्रदान के लिए असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ चर्चा की थी।
रिजिजू ने यह भी कहा था कि उन्होंने असम के मुख्यमंत्री से हाजोंग-चकमाओं के पुनर्वास के लिए उपयुक्त स्थानों का चयन करने के लिए भी कहा था। उन्होंने आगे कहा था कि वे इस डर से गुप्त रूप से काम कर रहे थे कि अगर यह मुद्दा पहले ही बहुत अधिक चर्चा में आ गया तो राजनीतिक मुद्दा बन जाएगा। प्रेस कांफ्रेंस में रिजीजू की असम के अस्तित्व को चुनौती देने वाली भाजापा के गुप्त योजना के खुलासे के बाद हर तरफ प्रतिक्रिया होने लगी थी। पार्टियों और संगठनों की प्रतिक्रिया के बाद सीएम डॉ. शर्मा को भी मीडिया के सामने मुंह खोलने पर मजबूर होना पड़ा। सीएम ने इस बात से इनकार किया कि केंद्रीय मंत्री किरेन रिजीजू ने असम में चकमा-हाजोंगों के पुनर्वास पर कोई चर्चा की थी और दावा किया कि भारत सरकार ने भी ऐसी कोई बातचीत नहीं की है। स्वाभाविक रूप से लोकसभा चुनाव प्रचार के बीच केंद्रीय मंत्री किरेन रिजीजू की घोषणा ने न केवल असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा को लोगों के प्रति जवाबदेह बना दिया है बल्कि वे इस विषय को लेकर बेहद असहज हो रहे हैं।
इस दौरान असम जातीय परिषद सहित हर विपक्षी राजनीतिक दल चुनाव प्रचार में भी केंद्रीय मंत्री किरण रिजीजू की टिप्पणी को लेकर मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा तथा भाजपा पर निशाना साधने की कोशिश की जिसके कारण भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व भी चिंतित है। पार्टी नेतृत्व के गुस्से के परिणामस्वरूप केंद्रीय मंत्री किरेन रिजीजू को चकमा-हाजोंग के बारे में अपने बयानों को स्पष्ट करने के लिए मजबूर होना पड़ा। गुरुवार को केंद्रीय मंत्री किरेन रिजीजू ने तुरंत दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में असम के पत्रकारों के सामने अपने पहले दिए गए बयान का खंडन किया। इस बार रिजीजू को चकमा-हाजोंग शरणार्थियों के पुनर्वास के लिए सीएम हिमंत विश्व शर्मा से सहायता के लिए अनुरोध करने की बात कहकर यू-टर्न लेते नजर आए। इसके अलावा उन्होंने पत्रकारों पर उनकी टिप्पणी को लेकर दुष्प्रचार करने का भी आरोप लगाया।