लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण में 13 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के 88 लोकसभा क्षेत्रों में 26 अप्रैल को मतदान हो रहा है। स्वतंत्र एवं निष्पक्ष मतदान के लिए चुनाव आयोग ने पूरी तैयारी की है। मतदान के प्रति युवा वर्ग की उदासीनता निश्चित रूप से चिंता का विषय है। 26 अप्रैल को होने वाले मतदान में केरल की सभी 20 सीटों, कर्नाटक की 14, राजस्थान की 13, उत्तर प्रदेश एवं महाराष्ट्र की 8-8, मध्यप्रदेश की 6, असम और बिहार की 5-5, छत्तीसगढ़ एवं पश्चिम बंगाल की 3-3, जम्मू-कश्मीर एवं त्रिपुरा की 1-1 सीट पर मतदान होने जा रहा है। मतदाता कुल 1202 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे।
असम की पांच लोकसभा क्षेत्रों- नगांव, दरंग-उदालगुड़ी, सिलचर, करीमगंज एवं डिफू में मतदान होगा। इन पांचों क्षेत्रों से कुल 61 उम्मीदवार मैदान में हैं। सबसे ज्यादा करीमगंज से 24 तथा सबसे कम डिफू से पांच उम्मीदवार मैदान में हैं। शुक्रवार को होने वाले मतदान के दौरान राज्य के तीन सांसद, दो मंत्री तथा दो विधायकों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। नगांव से कांग्रेस उम्मीदवार व वर्तमान सांसद प्रद्युत बरदलै का मुकाबला भाजपा के उम्मीदवार सुरेश बोरा से है। इसी तरह दरंग-उदालगुड़ी क्षेत्र से भाजपा के उम्मीदवार व वर्तमान सांसद दिलीप सइकिया का मुकाबला कांग्रेस के पूर्व सांसद माधव राजबंशी से है।
सिलचर लोकसभा क्षेत्र से परिवहन मंत्री परिमल शुक्लवैद्य अपना किस्मत आजमा रहे हैं। एआईयूडीएफ के विधायक अमिनुल इस्लाम नगांव से, बीपीएफ से विधायक दुर्गादास बोड़ो दरंग-उदालगुड़ी से तथा वर्तमान सांसद कृपानाथ मल्लाह करीमगंज से भाजपा की तरफ से चुनाव मैदान में हैं। इन पांचों लोकसभा क्षेत्रों में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा एवं केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनोवाल, कांग्रेस की तरफ से गौरव गोगोइ एवं प्रदेश अध्यक्ष भूपेन बोरा तथा टीएमसी की तरफ से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने-अपने उम्मीदवारों के पक्ष में चुनाव प्रचार किया था। अमित शाह ने परिमल शुक्लवैद्य के समर्थन में सिलचर में रोड शो किया, जबकि ममता बनर्जी ने टीएमसी उम्मीदवार के पक्ष में रैली को संबोधित किया।
24 अप्रैल को चुनाव प्रचार खत्म होने से पहले सभी पार्टी के उम्मीदवारों ने चुनावी रैली तथा रोड शो में पूरी ताकत झोंकी। मतदाताओं को रिझाने के लिए विभिन्न पार्टी के उम्मीदवारों ने अपनी-अपनी पार्टी के घोषणा-पत्रों में लोकलुभावन वादे को शामिल किया है। यह वादा कैसे पूरा होगा इसकी विस्तृत योजना किसी के पास नहीं है। इस बार के चुनाव में सोशल मीडिया का भी काफी इस्तेमाल हो रहा है। देश के कुछ जगहों में कम हो रहे मतदान के प्रतिशत पर चुनाव आयोग को ध्यान देना चाहिए। लोकतंत्र की मजबूती के लिए ज्यादा से ज्यादा लोगों का मतदान केंद्र पर पहुंचना जरूरी है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। इस चुनाव पर देश-विदेश की नजरें हैं। ऐसी स्थिति में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव करवाना जरूरी है ताकि भारत की साख दुनिया में बनी रहे। 144 करोड़ जनसंख्या वाले भारत में होने वाला लोकतांत्रिक चुनाव यह दर्शाता है कि भारत में अनेकता में एकता कितनी मजबूत है।