मालदीव में वहां की संसद मजलिस के लिए हुए आम चुनाव में मुहम्मद मोइज्जू की पार्टी पीपुल्स नेशनल कांफ्रेंस ने 93 में से 68 सीटों पर विजय दर्ज किया है। इस प्रकार मोइज्जू की पार्टी ने मजलिस में दो-तिहाई बहुमत हासिल कर लिया है। भारत विरोधी मोइज्जू की पार्टी की भारी जीत ने भारत के लिए चुनौती पैदा कर दी है। मोइज्जू पहले ही इंडिया आउट का नारा देकर राष्ट्रपति बने थे। शपथ ग्रहण के बाद मोइज्जू ने कई भारत विरोधी फैसले लिये जिसको लेकर दोनों देशों के बीच दूरियां लगातार बढ़ती रही। मोइज्जू सरकार के तीन मंत्रियों ने प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की जिसके बाद भारत में पर्यटन के क्षेत्र में मालदीव का बहिष्कार ट्रेंड शुरू हुआ जिसका खामियाजा मालदीव भुगत रहा है। पहले मजलिस में भारत समर्थक इब्राहिम सालेह की पार्टी मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी का बहुमत था। इस पार्टी के 44 सांसद थे। वर्ष 2018 में इब्राहिम सालेह मालदीव के राष्ट्रपति बने थे। उनके शासन में भारत और मालदीव के मधुर संबंध रहे। उन्होंने फर्स्ट इंडिया नीति के तहत राष्ट्रपति बनने के बाद सर्वप्रथम भारत का दौरा किया था। 98 प्रतिशत सुन्नी मुस्लिम आबादी वाला मालदीव 1200 द्वीपों को मिलाकर देश बना है। मोइज्जू ने राष्ट्रपति बनने के बाद सर्वप्रथम तुर्की और चीन की यात्रा की तथा कई समझौते भी किये जिसमें सामरिक समझौता भी शामिल है। मालदीव ने अपने यहां कार्यरत भारतीय सैनिकों को भी देश छोड़ने का अल्टीमेटम दे दिया है। भारत के नजदीक बसा मालदीव सामरिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण देश है, जिस पर चीन की हमेशा नजर लगी रहती है। चीन मालदीव में भारत विरोधी गतिविधियों को प्रोत्साहित कर अपने पाले में रखना चाहता है। चीन ने मालदीव के साथ मुक्त व्यापार समझौता भी किया है तथा भारी भरकम कर्ज भी दिया है। मालदीव पर जितना कर्ज है उसका 60 प्रतिशत हिस्सा केवल चीन का है। चीन मालदीव में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाकर भारत पर दबाव डालने की रणनीति पर काम कर रहा है। भारत भी स्थिति की गंभीरता को समझते हुए मनीकॉय द्वीप पर नौसैनिक बेस स्थापित कर रहा है। यह चीन के लिए करारा जवाब होगा। मालदीव खाद्य सामग्री सहित कई मामले में भारत पर निर्भर है। दूसरे देशों से खाद्य सामग्री आयात करने पर ज्यादा खर्च आएगा जो मालदीव की सेहत के लिए ठीक नहीं है। चीन मालदीव के साथ-साथ नेपाल और बांग्लादेश में इंडिया बायकॉट का नारा लगवा कर भारत विरोधी भावनाओं को और भड़काने में लगा है। नेपाल में हाल ही में वहां की दोनों कम्युनिस्ट पार्टियों के बीच हुआ गठबंधन इसका जीता जागता उदाहरण है। चीन ने भारत समर्थक नेपाली कांग्रेस को सरकार से बाहर कर दिया है। इसी तरह बांग्लादेश में चीन वहां के लोगों को भारत के खिलाफ भड़काने में लगा है। शेख हसीना सरकार ऐसे तत्वों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। भारत को इस मामले में सतर्क रहना पड़ेगा। बांग्लादेश कट्टरपंथियों एवं आतंकियों का गढ़ बन गया है। यह संतोष की बात है कि हसीना सरकार ऐसे तत्वों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। बांग्लादेश को आजादी दिलाने में भारत का बहुत बड़ा हाथ है। इसी तरह नेपाल को भी अपने विकास में भारत की अहमियत को समझना पड़ेगा। जमीनी सीमा से सटे नेपाल का भारत के साथ घनिष्ठ संबंध रहा है। नेपाल के लोग भारत में आकर रोजी-रोटी की तलाश करते हैं तथा काम करते हैं। भारतीय सेना में भी गोर्खा रेजीमेंट है, जिसमें नेपाल के युवकों की भर्ती की जाती है। भारत को चीन की साजिश को नाकाम करने के लिए कारगर कदम उठाना चाहिए। चीन हिंद महासागर में अपना दबदबा बनाने के लिए मालदीव एवं श्रीलंका को मोहरे की तरह इस्तेमाल करना चाहता है। शुरुआती झिझक के बाद श्रीलंका ने चीन की साजिश में शामिल होने से मना कर दिया क्योंकि भारत ने ही मुसीबत के वक्त उसका साथ दिया था। मालदीव को संभालना भारत की विदेश नीति के लिए अग्नि परीक्षा है। पर्यटन के क्षेत्र में लगातार पिछड़ने के बावजूद मालदीव सुधरने का नाम नहीं ले रहा है। भारत को मालदीव के ऊपर आर्थिक एवं कूटनीतिक दवाब देना चाहिए ताकि उसे अपनी गलती का एहसास हो।
मालदीव में भारत की बढ़ती चुनौती
