नई दिल्ली : 2024 लोकसभा चुनाव के पहले और दूसरे फेज की 190 सीटों पर 2810 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। इनमें पहले फेज में 1618 और दूसरे फेज में 1192 उम्मीदवारों में से 501 यानी 18 प्रति. के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें से 327 यानी 12 प्रति. के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले हैं। जिनमें 5 साल या उससे ज्यादा की सजा हो सकती है। एडवोकेट विजय हंसारिया ने सुप्रीम कोर्ट को दिए हलफनामे में एडीआर के हवाले से यह जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि सांसदों और विधायकों से जुड़े क्रिमिनल केस की सुनवाई करने वाली स्पेशल कोर्ट ने 2023 में 2000 से ज्यादा मामलों में फैसला सुनाया है। विजय को सांसदों/विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों के जल्दी निपटारे की मांग वाली एक जनहित याचिका में न्यायमित्र (एमिकस क्यूरी) बनाया गया था।
विजय के मुताबिक, लगभग 501 उम्मीदवार पहले दो चरणों में लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं, उन पर अदालतों में आपराधिक मामले अभी भी चल रहे हैं। हंसारिया ने सुप्रीम कोर्ट को दिए हलफनामे में यह मांग की है कि संबंधित अदालतों को इन उम्मीदवारों के खिलाफ लंबित मामलों और जांच को जल्द निपटाने के सख्त निर्देश दिए जाएं। इसके पीछे वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि 2019 के लोकसभा चुनावों में भी यही स्थिति थी, जिसमें 7928 उम्मीदवारों में से 1500 उम्मीदवारों (19 प्रति.) पर आपराधिक मामले थे। इनमें से 1070 उम्मीदवारों (13 प्रति.) पर गंभीर आपराधिक मामले थे। चुनाव जीतकर संसद पहुंचे 514 सदस्यों में से 17वीं लोकसभा (2019-2024) में 225 सदस्यों (44 प्रति.) के खिलाफ आपराधिक मामले थे।
यानी आपराधिक मामले वाले उम्मीदवारों ने बिना आपराधिक मामले वाले उम्मीदवारों की तुलना में अधिक सीटें जीती थीं। हंसारिया ने अलग-अलग हाई कोर्ट से मिली जानकारी के आधार पर एक टेबल चार्ट बनाकर कोर्ट को दिया। इसमें बताया गया कि 1 जनवरी 2023 तक सांसद/विधायकों के खिलाफ 4697 आपराधिक मामले दर्ज थे। 2023 में ही 2018 मामलों का निपटारा हो चुका है। 2023 में सांसदों/विधायकों के खिलाफ 1746 नए आपराधिक मामले दर्ज किए गए। इस तरह 1 जनवरी 2024 तक इन पर कुल 4474 मामले लंबित हैं।
हलफनामे में ये मांगें भी रखीं : हाई कोर्ट, स्पेशल कोर्ट एमपी/एमएलए के पीठासीन अधिकारियों से उन सभी मामलों की रिपोर्ट मांग सकता है जो 3 साल से ज्यादा समय से पेंडिंग हैं। साथ ही पेंडिंग होने की वजह भी बताई जाए। केस की रियल टाइम प्रोग्रेस जानने के लिए नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड की तरह एक मॉडल वेबसाइट बनाई जाए। इस काम के लिए एक कमेटी बनाई जाए, जिसमें कानून और न्याय की समझ रखने वाले लोगों को शामिल किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर 2023 में सांसदों के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों की तेजी से सुनवाई करने के लिए सभी हाईकोर्टों को निर्देश दिया था। साथ ही निगरानी के लिए एक विशेष बेंच बनाने भी कहा था। कोर्ट ने कहा था कि संसद, विधान सभाओं और विधान परिषदों के सदस्यों के खिलाफ आपराधिक मामलों को प्राथमिकता दी जाए।