मालदीव में जिन लोगों ने संसदीय चुनावों के लिए सबसे पहले वोट डाला, उनमें 45 वर्षीय राष्ट्रपति मुईज्जू भी शामिल रहे।  हिंद महासागर में टापुओं पर बसे मालदीव में साढ़े नौ घंटों तक वोटिंग  हुई। मुख्य चुनाव आयुक्त फाउद तौफीक ने देश के सभी 2,84,663 मतदाताओं से अपना वोट जल्द से जल्द डालने की अपील की। मालदीव को दक्षिण एशिया में सबसे महंगे पर्यटन स्थलों में गिना जाता है, जहां साफ-सुथरे और चमकदार पानी वाले तट और आलीशान रिजॉर्ट हैं, लेकिन हाल के सालों में भू-राजनीतिक नजरिए से भी यह छोटा-सा देश बहुत अहम हो गया है। पूर्व से पश्चिम की तरफ जाने वाले मालवाहक जहाज मालदीव के 1,192  कोरल द्वीपों के पास से होकर गुजरते हैं, जो करीब 800 किलोमीटर के दायरे में फैले हैं।

मुईज्जू ने पिछले साल सितंबर में हुए राष्ट्रपति चुनाव में जीत दर्ज की। माना जाता है कि मुईज्जू चीन समर्थक पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्लाह यामीन के इशारे पर काम करते हैं। पिछले हफ्ते ही एक अदालत ने भ्रष्टाचार के मामले में यामीन को मिली 11 साल की सजा को दरकिनार करते हुए उन्हें रिहा किया है। इस महीने जब संसदीय चुनावों के लिए प्रचार जोरों पर था, तब मुईज्जू ने चीन की सरकारी कंपनियों को कई बड़े निर्माण प्रोजेक्ट दिए। उनकी सरकार भारत के उन 89 सैनिकों को भी उनके देश भेजने की तैयारी कर रहे हैं, जो भारत की तरफ से मालदीव को दिए गए एक निगरानी विमान को संचालित करते हैं, यह विमान मालदीव की व्यापक समुद्री सीमाओं की निगरानी के लिए भारत ने तोहफे में दिया था। मालदीव की मौजूदा संसद में भारत समर्थक मानी जाने वाली मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (एमडीपी) का दबदबा है। पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोहिल की पार्टी एमडीपी चीन की तरफ मुईज्जू प्रशासन के अत्यधिक झुकाव से खुश नहीं है।

मुईज्जू के एक करीबी का कहना है कि रविवार को हो रहे आम चुनावों के पीछे कहीं ना कहीं भू-राजनीति काम कर रही है।  वह (मुईज्जू) इस वादे के साथ सत्ता में आए थे कि वह भारतीय सैनिकों को वापस उनके देश भेज देंगे और वह इसी पर काम कर रहे हैं। जब से वह सत्ता में आए हैं, संसद उनके साथ सहयोग नहीं कर रही है। जब से मुईज्जू ने सत्ता संभाली है, संसद ने कैबिनेट में तीन पदों पर उनकी तरफ से प्रस्तावित तीन लोगों की नियुक्तियों पर रोक लगा दी और उनके कुछ खर्च प्रस्तावों को मंजूर करने से भी इनकार कर दिया।

मुईज्जू की पार्टी समेत कई मुख्य राजनीतिक दलों में हुई टूट के बाद लगता है कि किसी भी एक पार्टी को संसद में स्पष्ट बहुमत नहीं मिलेगा, वैसे मुईज्जू की पार्टी पीपल्स नेशनल कांग्रेस (पीएनसी) को उस वक्त बल मिला जब गुरुवार को पूर्व राष्ट्रपति यामीन को घर पर नजरबंदी से रिहा कर दिया गया। माले की एक अदालत ने उनके खिलाफ रिश्वत और मनी लांड्रिंग से जुड़े मामले में फिर से मुकदमा चलाने का आदेश दिया है। यामीन को 2018 में चुनाव हारने के बाद भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल जाना पड़ा था।

यामीन ने भी सत्ता में रहते हुए चीन के साथ नजदीकी रिश्ते कायम किए थे, लेकिन भ्रष्टाचार के आरोपों में दोषी करार दिए जाने के कारण वह पिछले साल हुए राष्ट्रपति चुनाव में हिस्सा नहीं ले सके, फिर उन्होंने अपनी जगह मुईज्जू को चुनाव लड़ाया। वह भारत विरोधी अपने रुख पर अड़े रहे। इससे मुईज्जू को चुनाव में फायदा हुआ। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि मालदीव में जो राजनीतिक बदलाव आया है, वह भारत के हित में नहीं है, वहां जिस तरह से चीन का दबदबा बढ़ रहा है, उससे उस क्षेत्रों में अशांति की स्थिति उत्पन्न हो गई है। माना जा रहा है कि पर्यटन उद्योग के लिए उपयुक्त मालदीव में किसी भी तरह की अशांति ठीक नहीं है, इस बात को मालदीव के नेताओं को भली-भांति समझने की जरूरत है।