भारतीय संस्कृति के हिन्दू धर्म में एकादशी का कितना महत्व है, यह तो सभी जानते हैं। एकादशी तिथि भगवान श्रीविष्णु को समर्पित होती है। हर महीने में दो बार एकादशी पड़ती है, जिससे पूरे 1 वर्ष में 24 या 25 एकादशी आती हैं। पुराणों के अनुसार कामदा एकादशी का व्रत करने से भगवान श्रीहरि विष्णु की विशेष कृपा मिलती है। प्रख्यात ज्योतिषविद् विमल जैन ने बताया कि चैत्र शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि कामदा एकादशी के नाम से जानी जाती है। इस बार चैत्र शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि 18 अप्रैल, गुरुवार को सायं 5 बजकर 32 मिनट पर लगी जो कि 19 अप्रैल, शुक्रवार को रात्रि 8 बजकर 05 मिनट तक रहेगी।

मघा नक्षत्र 18 अप्रैल, गुरुवार को प्रात: 7 बजकर 57 मिनट से 19 अप्रैल, शुक्रवार को प्रात: 10 बजकर 57 मिनट रहेगा। जिसके फलस्वरूप 19 अप्रैल, शुक्रवार को यह व्रत रखा जाएगा। कामदा एकादशी की विशेष महत्ता है, जैसा कि तिथि के नाम से ही ज्ञात है कि तिथि विशेष के दिन सम्पूर्ण दिन व्रत उपवास रखकर सभी कार्यों में सफलता प्राप्त की जा सकती है, साथ ही व्रतकर्ता को कभी भी राक्षसयोनि में जन्म नहीं लेना पड़ता। 

व्रत का विधान : ज्योतिषविद् ने बताया कि व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर अपने समस्त दैनिक कृत्यों से निवृत्त होकर गंगा-स्नानादि करना चाहिए। गंगा-स्नान यदि सम्भव न हो तो घर पर ही स्वच्छ जल से स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए। अपने आराध्य देवी-देवता की पूजा-अर्चना के पश्चात कामदा एकादशी के व्रत का संकल्प लेना चाहिए। सम्पूर्ण दिन व्रत उपवास रखकर जल आदि कुछ भी ग्रहण नहीं करना चाहिए। विशेष परिस्थितियों में दूध या फलाहार ग्रहण किया जा सकता है। आज के दिन सम्पूर्ण दिन निराहार रहना चाहिए, चावल तथा अन्न ग्रहण करने का निषेध है।

भगवान् श्रीविष्णु की विशेष अनुकम्पा-प्राप्ति एवं उनकी प्रसन्नता के लिए भगवान् श्रीविष्णु जी के मन्त्र  'ऊ नमो नारायण' या 'ऊ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का नियमित रूप से अधिकतम संख्या में जप करना चाहिए। आज के दिन ब्राह्मण को यथा सामथ्र्य दक्षिणा के साथ दान करके लाभ उठाना चाहिए। जीवन में सुख-समृद्धि, आरोग्य व सौभाग्य में अभिवृद्धि भी होती है। मन-वचन कर्म से पूर्णरूपेण शुचिता बरतते हुए यह व्रत करना विशेष फलदाई रहता है। भगवान श्रीविष्णु जी की श्रद्धा, आस्था भक्तिभाव के साथ आराधना कर पुण्य अर्जित करके लाभ उठाना चाहिए।

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