राम अवतार शर्मा

चैत्रे नवम्यां प्राक् पक्षे

दिवा पुण्ये पुनर्वसौ।।

उदये गुरु गौरान्श्वो: 

स्वोच्चस्थे ग्रहपंचके।

मेषे पूषणि सन्प्राप्ते

लग्ने कर्कटकाह्वये।।

अविरासीन्महाविष्णु:

कौशल्यायां पर: पुमन्।

आनन्द रामायण,मनोहर कांड (9796998 )

अर्थात- चैत्र मास के प्रथम पक्ष में,मध्याह्न में पवित्र पुनर्वासु नक्षत्रमें, बृहस्पति एवं चन्द्रमा के उदय रहने ,पांच ग्रहों के अपने उच्च स्थान पर बैठे रहने पर, सूर्य के मेष राशि में होने पर कर्क लग्न में माता कौशल्या से महाविष्णु परम पुरूष श्रीराम का अवतार हुआ।

चैत्र मास की नवमी तिथि को जब भगवान भू भाष्कर सूर्य नारायण मध्य आकाश में चमक रहे थे, उस समय सूतिकागृह में माता कौशल्या के समक्ष अखण्ड कोटि ब्रह्माण्ड नायक करुणा वरूणालय सद् चिद् आनन्द घन भगवान श्रीहरि विष्णु साक्षात् प्रकट हुए। उस समय वे पीतांबर धारण किए हुए थे। वर्षाकालीन मेघ के समान उनका श्याम वर्ण था और शंख चक्र गदा व पद्म पुष्प धारी चतुर्भुज स्वरूप में कोटि कमनीय मनोहारि प्रतीत हो रहे थे। भगवान श्रीहरि का वह चतुर्भुज रूप देखकर माता कौशल्या ने उनसे बाल रूप धारण करने की प्रार्थना की। तदंतर क्षणभर में भगवान विष्णु नन्हें-से शिशु के रूप में प्रकट हो गए। उस समय उनके शरीर की आभा सुवर्ण के समान पीत थी। उनके नेत्र कमल के समान (कमलनयन) थे। उनका श्रीमुख चन्द्रमा के समान था और उनकी प्रभा सूर्य के समान तेज से संपन्न थी।

कुछ काल के पश्चात माता सुमित्रा के समक्ष भगवान शेष भी बाल रूप धारण कर प्रकट हुए और फिर माता कैकेयी के गर्भ से भगवान विष्णु के दो आयुध शंख और चक्र एक साथ ही भारत और शत्रुघ्न के रूप में प्रकट हुए। इस प्रकार वे चारों बालक राम, लक्ष्मण,भारत और शत्रुघ्न अत्यंत ही शुभ समय में प्रकट हुए।  तदंतर महाराज दशरथ ने गुरु महर्षि वशिष्ठजी से यथाविधि जात कर्म आदि संस्कारों को संपन्न कराया। गुरु वशिष्ठजी ने कौशल्या के पुत्र; जो सभी भाइयों में जेष्ठ थे, उनका  राम नाम रखा। सुमित्राके पुत्र का नाम लक्ष्मण और कैकेयी के पुत्रों का भरत तथा शत्रुघ्न रखा।

मनोहर तथा सर्वानन्द प्रदान करने वाले होने से राम,अत्यंत शुभ लक्षणों से संपन्न होने के कारण लक्ष्मण, भरण-पोषण करने में तत्पर रहने से भरत और शत्रुओं का मर्दन करनेवाला होने से गुरु वशिष्ठ ने शत्रुघ्न यह नाम रखा। एक बार महर्षि मुद्गल ने महाराज दशरथ को श्रीराम के भविष्य के विषय में विस्तारपूर्वक बताया-  हे राजन! साक्षात् नारायण भगवान श्रीहरि विष्णु, सर्वव्यापी जनार्दन ने ही पृथ्वी के भार का हरण करने के लिए और आपके महान पुण्य के उदय होने से यहां अवतार धारण किया है। आपके ये पुत्ररत्न रघुश्रेष्ठ श्रीराम अधर्म का विनाश,धर्म की वृद्धि, दुष्टों का मर्दन और सज्जनों का पालन करेंगे। भगवान श्रीराम के प्रभाव से अयोध्या में जिस ऋ तु में जो द्रव्य और फल-पुष्प आदि होने चाहिए, वे सभी नियत समय पर होते थे। न कभी अनावृष्टि होती और न कहीं चोर आदि का भय था।  मो. 9435047458