पड़ोसी देश चीन लगातार भारत के खिलाफ साजिश रचने में लगा हुआ है। अक्साई चीन हड़पने के बाद उसकी नजर अरुणाचल प्रदेश पर लगी हुई है। ड्रैगन लगातार अरुणाचल प्रदेश के बड़े हिस्से को दक्षिण तिब्बत का हिस्सा बताकर भारत के राजनेताओं के दौरे का विरोध करता है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अरुणाचल प्रदेश का दौरा किया था। उन्होंने अरुणाचल की धरती से पूर्वोत्तर के राज्यों के लिए कई बड़ी योजनाओं का शिलान्यास एवं लोकार्पण किया था। सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि प्रधानमंत्री ने अरुणाचल में लगभग 14 हजार फीट की ऊंचाई पर बने सेला सुरंग का उद्घाटन किया। सेला सुरंग सामरिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सुरंग आम जनता के साथ-साथ सेना को सालों भर आवागमन की गारंटी देता है।
पहले बर्फवारी के कारण चीन की सीमा तक पहुंचना मुश्किल हो जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। सेला सुरंग बनने से असम एवं अरुणाचल के बीच संपर्क आसान हो गया है तथा सीमा पर पहुंचने की दूरी 10 किलोमीटर कम हो गई है। इस सुरंग से गुजरने वाले वाहनों पर चीन की नजर नहीं पड़ेगी। इसके बाद भारत ने चीन से सटे उत्तराखंड की सीमा पर और दस हजार सैनिकों को तैनात कर दिया है, ताकि चीन की घुसपैठ पर अंकुश लग सके। इसके बाद चीन का बौखलाना स्वाभाविक है। कड़ी प्रतिक्रिया देने के बाद ड्रैगन ने अरुणाचल प्रदेश के 30 जगहों के नाम बदल दिये, जिसमें पहाड़, झील आदि शामिल हैं। वर्ष 2017 से अब तक चीन ने अरुणाचल के 62 जगहों का नाम बदल दिया है। अब भारत को भी करारा जवाब देने की जरुरत है।
असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा ने तिब्बत के साठ जगहों का नाम भारतीय भाषा में बदलकर चीन को कड़ा जवाब देने का भारत सरकार से अनुरोध किया है। डॉ. शर्मा का मानना है कि इस तरह के कदम से चीन को सबक मिलेगा। एक अन्य भारतीय राजनयिक ने अक्साई चीन का नाम ङ्क्षहदी में नामकरण करने की सलाह दी है। इसके साथ-साथ भारत को सामरिक दृष्टि से भी मजबूत होने की जरुरत है। सेला सुरंग के लोकार्पण के बाद भारतीय सेना को ताकत मिलेगी, क्योंकि उसके आसपास सेना के चार क्षेत्रीय मुख्यालय हैं।
कूटनीतिक स्तर पर जवाब देने के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ ङ्क्षसह ने चीन पर कड़ा प्रहार किया है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जापान की धरती से चीन को आईना दिखाया है। भारतीय सेना भी चीनी सीमा पर मुश्तैदी के साथ डटी है। भारत चीन से सटी अपनी पूरी सीमा पर अपनी सामरिक तैयारी को लगातार मजबूत कर रहा है। सेना के साथ-साथ वायु सेना भी अपनी शक्ति में लगातार इजाफा कर रही है। ब्रह्मोस मिसाइल को भी तैनात किया गया है, जिसको रोकने के लिए चीन के पास कोई जवाब नहीं है। चीन जैसे कुटिल पड़ोसी पर कभी विश्वास नहीं किया जा सकता है। उसको करारा जवाब देने के लिए भारतीय सेना को हमेशा तैयार रहना होगा।