गुवाहाटी : फिलवक्त पूरा देश चुनावी मोड में आ गया है, इसी बीच असम की जोरहाट संसदीय सीट विशेष रूप से चर्चा का विषय बनी हुई है। यदि कहा जाए कि भाजपा इस चुनाव में गौरव गोगोई को हराकर 2026 के विधानसभा चुनाव को आसान बनाने में जुट गई है तो शायद गलती नहीं होगी। इसलिए जोरहाट के चुनाव पर सिर्फ असम ही नहीं, बल्कि देशभर की निगाहें जुट गई है। वैसे तो राज्य की 14 सीटों पर वोट डाले जाएंगे, परंतु यहां की तामुल-पान की दुकान से लेकर राजनीतिक क्षेत्रों में लोग एक-दूसरे से यही पूछ रहे हैं कि आखिरकार जोरहाट से कौन-सी पार्टी चुनाव जीतेगी और लोग अपने-अपने हिसाब से मूल्यांकन पेश कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि यहां मुख्य मुकाबला कांग्रेस के गौरव गोगोई और भाजपा के तपन गोगोई के बीच है। दोनों अपने-अपने स्तर पर चुनाव प्रचार कर रहे हैं। एक ओर गौरव गोगोई वनमैन आर्मी की तरह मतदाताओं के बीच पहुंच रहे हैं और अपने लिए वोट मांग रहे हैं। इसी क्रम में वोटरों के बीच पहुंचकर गौरव गोगोई यह कहना नहीं भूलते कि पिछली बार 2019 में जब मैं चुनाव मैदान में था तो मेरे सिर के ऊपर मेरे पिता और पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई का साया था, परंतु उनकी मृत्यु के बाद वह साया समाप्त हो गया है,परंतु मुझे उम्मीद है कि अब मेरे सिर पर इस क्षेत्र के लाखों मतदाताओं का साया होगा,जो मुझे शक्ति प्रदान करेगा और जीत भी दिलाएगा। वैसे आमतौर पर देंखे तो चुनाव प्रचार में भाजपा कांग्रेस से बहुत आगे है।

भाजपा का प्रचार पूर्व के आहोम साम्राज्य वाले इलाकों के साथ- साथ चाय बागान इलाकों में तेजी से चल रहा है। राज्य सरकार के कई मंत्री, विधायक और पार्टी के नेता यहां कैंप करके दिन-रात मेहनत कर रहे हैं और मतदाताओं से भाजपा को वोट देने का आग्रह कर रहे हैं। दूसरी ओर मुख्यमंत्री खुद जोरहाट संसदीय सीट के अंतर्गत आने वाली माजुली विधानसभा सीट से अपने चुनाव प्रचार अभियान का आगाज कर चुके हैं और उनके विश्वासी और करीबी मंत्रियों का यहां रहकर चुनाव प्रचार करना साबित करता है कि सीएम हर हाल में इस सीट पर जीत हासिल करने को आतुर हैं क्योंकि यदि गौरव गोगोई इस बार चुनाव जीत जाते हैं तो कांग्रेस अगला विधानसभा चुनाव-2026 उनके नेतृत्व में लड़ सकती है और यदि ऐसा हुआ तो अगले चुनाव में वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा को कड़ी टक्कर का सामना करना पड़ेगा और उनके लिए अश्वमेघ के घोड़े को अपनी ओर मोड़ लेना कठिन हो सकता है।

ऐसे में भाजपा जोरहाट में गौरव गोगोई को हराकर  2026 के मुकाबले को अभी से ही कम करने की तैयारी में है। कारण कि फिलहाल गौरव गोगोई को छोड़कर अधिकांश कांग्रेसी नेता मुख्यमंत्री के सामने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रुप से नतमस्तक हो गए हैं। इसलिए सीएम बार-बार कहते हैं कि 2026 से पहले कांग्रेस राज्य में अस्तित्वहीन हो जाएगी और प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भूपेन बोरा के भविष्य में भाजपा में शामिल हो जाने की बातें बार-बार कहते हैं। जानकारों का तो यहां तक कहना है कि प्रदेश कांग्रेस के अधिकांश नेता प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सीएम के संपर्क में हैं, उनमें कुछ को मेडिकल कालेज के निर्माण वगैरह में बड़ा ठेका मिल चुका है।

अपना नाम नहीं छापे जाने की शर्त पर एक कांग्रेसी नेता ने बताया कि उसके पास कांग्रेस की पूर्व सरकार से फिलहाल ज्यादा काम हैं और पहले की अपेक्षा जीवन अच्छा चल रहा है, फिर भी हम कांग्रेस में हैं। कारण कि सीएम चाहते हैं कि हम कांग्रेस में ही रहें।  दूसरी ओर गौरव गोगोई वर्तमान सरकार के सामने एक चुनौती के रूप में खड़े हैं, जो कई बार राज्य सरकार की आलोचना कर चुके हैं। बताते चलें कि एक सांसद के रूप में गौरव गोगोई का रिकार्ड काफी अच्छा रहा है, उन्होंने लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल के उपनेता के रूप में काफी ख्याति अर्जित की है।

कई मौकों पर उन्होंने संसद में ऐतिहासिक भाषण दिया, जो काफी प्रभावशाली रहा और असम के लोगों ने उन्हें काफी पसंद किया। उल्लेखनीय है कि इस चुनाव में आहोम और चाय समुदाय के वोटरों की अहम भूमिका है, वहीं चाय बागानों में भाजपा को मजबूत बताया जा रहा है।  वर्ष 2014 और वर्ष 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा की जीत में चाय बागानों ने अहम भूमिका निभाई, जबकि आहोम वोटरों में कांग्रेस और भाजपा के बीच विभाजन देखा गया था। इस बार क्या होगा? फिलहाल कुछ नहीं कहा जा सकता है,परंतु इतना तो कह ही सकते हैं कि मुकाबला आसान नहीं है, कांटे की टक्कर है।