पूर्वांचल प्रहरी संवाददाता गुवाहाटी : नीलाचल की पहाड़ियों में स्थित शक्तिपीठ मां कामाख्या देवालय में पूजा-अर्चना के नाम पर ऑनलाइन व्यापार का मामला सामने आया है। ऑनलाइन पोर्टल ऐप खोलकर शरारती तत्वों ने ऑनलाइन पूजा-अर्चना का अवैध धंधा शुरू किया है और अब मां कामाख्या की पूजा-अर्चना और यज्ञ के नाम पर भक्तों से धन इकट्ठा करने में जुट गए हैं। घर पर रहते हुए ऑनलाइन के जरिए कामाख्या मंदिर में पूजा करने के अवसर देने का वादा कर यह गिरोह विभिन्न एपों के माध्यम से ऑनलाइन के जरिए रुपए वसूल रहे हैं। दुनिया में आध्यात्मिकता के शिखर के रूप में माने जाने वाले कामाख्या मंदिर में मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए भारी संख्या में श्रद्धालुओं और भक्तों ने डिजिटल पूजा के नाम पर पैसे भेजे हैं। ये एप और ऑनलाइन पूजा पोर्टल उत्सव पूजा : शक्तिपीठ कामाख्या तीर्थ पूजा, श्री मंदिर-शक्तिपीठ पूजा ऑनलाइन, वामा-कामाख्या पूजा, देवधन वैवाहिक संबंधों में समस्याओं, पारिवारिक अशांति, धन प्राप्त करने में विफलता, बेरोजगार, बच्चों, भूतों और काले जादू से मुक्ति के उपाय के रूप में कामाख्या में पूजा देने के वादा किए है। श्रद्धालुओं व भक्तों को आकर्षित करने के लिए डिजिटल सर्कल ने नाटकीय संवादों के साथ विज्ञापन वीडियो भी अपलोड किए हैं। हिंदी में भक्तों को कामाख्या पूजा के लिए आमंत्रित करने वाले वीडियो में कहा गया है कि पुजारी एक निर्दिष्ट दिन पर भक्त की ओर से मां कामाख्या की पूजा करेंगे। भक्त के नाम पर पूजा के सभी वीडियो रिकॉर्ड किए जाएंगे और व्हाट्सएप पर भेजे जाएंगे और कामाख्या प्रसाद भी भक्त को कूरियर द्वारा भेजा जाएगा। ऐप्स में यह भी बताया गया है कि आपको पैकेज के रूप में पूजा के लिए कितना भुगतान करना होगा। उदाहरण के लिए यदि आप कामाख्या में संतान प्राप्ति के लिए वामा ऐप के माध्यम से पूजा करना चाहते हैं, तो आपको एक सदस्य के लिए 901 रुपए, पति-पत्नी या दो सदस्यों के लिए 1101 रुपए और एक परिवार के लिए 1501 रुपए का भुगतान करना होगा। चार में से उक्त पूजा को निपटाने के लिए आप ऐप के माध्यम से इस पैसे का अग्रिम भुगतान कर सकते हैं। डिजिटल पूजा के लिए भी महीने में 4-5 दिन होते हैं। आप इनमें से किसी भी दिन पूजा कर सकते हैं लेकिन धार्मिक आस्था से जुड़े कामाख्या मंदिर में डिजिटल पूजा के नाम पर कारोबार करने वाले लोगों ने कामाख्या मंदिर के अधिकारियों से क्या अनुमति ले रखी है। वह तो ज्ञात नहीं है यह भी स्पष्ट नहीं है कि क्या वे वास्तव में कामाख्या में पूजा करने के लिए भक्तों से पैसे लेते हैं या पूजा के नाम पर नकली वीडियो भेजते हैं।
ऑनलाइन पूजा-अर्चना के नाम पर अवैध रुपए वसूलने का सिलसिला जारी