पूर्वांचल प्रहरी संवाददाता गुवाहाटी : सुप्रीम कोर्ट नागरिकता संशोधन कानून (सीए) को लागू करने के लिए भारत सरकार द्वारा जारी 11 मार्च के नोटिस की वैधता पर सुनवाई करेगा। नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 237 मामले लंबित हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले के बिना नागरिकता संशोधन कानून, 2019 (सीएए) लागू नहीं हो सकता, लेकिन केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ और कानून का अवमानना करते हुए सीएए लागू करने का आदेश जारी कर दिया था। अधिवक्ता समीरन शर्मा ने 2 अप्रैल को असम सम्मिलित महासंघ के कार्यकारी अध्यक्ष मतीउर रहमान द्वारा दायर हस्तक्षेप याचिका 71897/2024 के तहत सात पेज की लिखित रिपोर्ट दायर की, जिसमें केंद्र सरकार द्वारा 11 मार्च में जारी निर्देशों पर रोक लगाने की मांग की गई थी। बीते 19 मार्च की सुनवाई के अंत में सुप्रीम कोर्ट ने अंकित यादव को अभियोजन पक्ष के लिए नोडल वकील और कनु अग्रवाल को सरकार के लिए नोडल वकील नियुक्त किया। मतीउर रहमान की ओर से अधिवक्ता समीरन शर्मा ने 2 अप्रैल को नोडल काउंसिल को रिपोर्ट सौंपी। सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को केंद्र सरकार की ओर से अभियोजन की रिपोर्ट का जवाब 8 अप्रैल में मुख्य न्यायाधीश की अदालत में दाखिल करने का निर्देश दिया। मीडिया को जारी एक बयान में सम्मिलित महासंघ के कार्यवाहक अध्यक्ष मतीउर रहमान ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मुख्य न्यायाधीश धनंजय यशवंत चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्र की तीन सदस्यीय पीठ 9 अप्रैल को नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीए) को लागू करने के लिए जारी निर्देशों पर रोक लगाने की मांग वाली हस्तक्षेप याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। मतीउर रहमान ने कहा कि देश के प्रसिद्ध वकील श्याम दीवान और वरिष्ठ वकील विजय हंसारिया सुप्रीम कोर्ट में महासंघ की ओर से बहस करेंगे। दीवान और हंसारिया की सहायता अधिवक्त समीरन शर्मा और अधिवक्ता सृष्टि बरठाकुर करेंगे। उन्होंने कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 की संवैधानिक वैधता पर सुनवाई मुख्य न्यायाधीश के निर्देशानुसार बाद में की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट में सीएए पर सुनवाई कल