सिमलगुड़ी : असम की पांच लोकसभा सीटों में आगामी 19 अप्रैल को पहले चरण के तहत होने वाले मतदान को लेकर सभी दल अपने प्रचार अभियान को तेज करने में लगे हुए हैं। उल्लेखनीय है कि इस दिन राज्य की पांच संसदीय सीटों जोरहाट, लखीमपुर, काजीरंगा, डिब्रूगढ़ एवं शोणितपुर सीटों के लिए मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग कर सकेंगे। इस बीच निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार स्थानीय प्रशासन भी पूरी तरह से चुनावी तैयारियों को पुख्ता करने में जुट चुका है,वहीं राजनीतिक दलों की सरगर्मियां भी पूरे तापमान पर देखी जा रही है। खासकर जोरहाट लोकसभा सीट इस बार भाजपा के लिए जहां साख का सवाल बनी हुई है,वहीं कांग्रेस अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा को वापस पाने के लिए जोरहाट सीट को अहम मान रही है।

वैसे भी जोरहाट संसदीय सीट का अपना एक गरिमामय चुनावी इतिहास रहा है। वर्ष 1971 से लगातार कांग्रेस या निर्दलीय के खाते में रही इस सीट पर वर्ष 2014 में पहली बार कमल खिला था और इस बार कांटे की टक्कर देखने को मिलने के पूर्ण आसार हैं। इस बार के चुनाव में जोरहाट संसदीय सीट राज्य से लेकर नई दिल्ली तक चुनावी मानचित्र पर चर्चाओं में हैं। बताते चलें कि जोरहाट संसदीय सीट अपने अवतरण के बाद से ही अधिकतर समय तक कांग्रेस के कब्जे में रही है। लेकिन जोग, लगन, ग्रह, वार और तिथियों की तरह राजनीतिक समीकरण भी बदलते रहते हैं और जोरहाट संसदीय सीट ने भी वर्ष 2014 में एक नया इतिहास रचते हुए पहली बार यहां से भारतीय जनता पार्टी को विजयश्री दिलाते हुए कामाख्या प्रसाद तासा को अपने प्रतिनिधि के रूप में सांसद चुना, वहीं वर्ष 2019 में पुन: जोरहाट लोकसभा सीट भाजपा के खाते में आई और इस बार भाजपा प्रत्याशी के रूप में तपन कुमार गोगोई सांसद चुने गए।

भाजपा ने जोरहाट सीट पर हैट्रिक लगाने के इरादे से इस बार भी तपन कुमार गोगोई को दोबारा चुनावी मैदान में उतारते हुए अपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि जोरहाट लोकसभा सीट से वर्ष 2014 में सांसद रहे कामाख्या प्रसाद तासा को निकटवर्ती काजीरंगा सीट से प्रत्याशी के रूप में उतारा गया है, वहीं जोरहाट सीट से कांग्रेस ने भी विपक्षी दलों के साझे उम्मीदवार के रूप में युवा चेहरे गौरव गोगोई को तपन के खिलाफ खड़े करते हुए अपनी हारी हुई बाजी को फिर से पलटने की पुरजोर कोशिश करने में जुटी है। मालूम हो कि वर्ष 1971 तथा वर्ष 1977 में गौरव गोगोई के पिता दिवंगत तरुण गोगोई जोरहाट लोकसभा सीट से लगातार दो बार सांसद चुने गए थे।

इधर मौजूदा परिपेक्ष्य में चुनाव प्रचार के शुरूआती चरण को देख यह साफ दिख रहा है कि गौरव गोगोई को भाजपा किसी भी सूरत में हलके में लेना नहीं चाहती। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मुख्यमंत्री ने अपनी विजय संकल्प यात्रा के तहत लोकसभा चुनाव के प्रचार अभियान का आगाज भी जोरहाट सीट से किया। सत्रनगरी माजुली में साइकिल रैली से प्रचार अभियान शुरू कर सीएम ने यह साफ कर दिया कि यह सीट भाजपा के लिए कितनी अहम है। वहीं दूसरी तरफ भाजपा के उम्मीदवार तपन गोगोई के पक्ष में प्रचार करने के लिए राज्य के कैबिनेट मंत्री पीयूष हजारिका पिछले कई दिनों से शिवसागर व चराईदेव जिले के विभिन्न स्थानों पर तूफानी दौरे करते हुए रैलियों तथा चुनावी सभाओं में भाग ले रहे हैं। पिछले दो दिनों तक नाजिरा में चुनावी प्रचार करने के बाद मंत्री हजारिका अब चराईदेव जिले में प्रचार तेज करने में जुट गए हैं। इस बीच कांग्रेस प्रत्याशी गौरव गोगोई भी प्रचार में पीछे नहीं है।

रविवार को नाजिरा में पंद्रह स्थानों पर जनसभाएं करने के बाद गौरव गोगोई ने सोमवार को शिवसागर, मंगलवार को मरियानी तथा आज बुधवार को माजुली में चुनावी प्रचार किया। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को उतारने के बजाय गौरव गोगोई पिछले एक पखवाड़े से अकेले अपने दम पर प्रचार कर रहे हैं। हालांकि नाजिरा और शिवसागर में प्रचार के दौरान पार्टी के विधायक व नेता प्रतिपक्ष देवव्रत सैकिया तथा शिवसागर के विधायक अखिल गोगोई का साथ जरूर मिला। जोरहाट संसदीय सीट पर जातीय समीकरण पर नजर डालें तो इस सीट के निर्णायक मतदाताओं में आहोम एवं चाय समुदाय के मतदाता सर्वोच्च संख्या में हैं। लगभग पांच लाख पचास हजार आहोम मतदाताओं की संख्या के बाद दूसरा सबसे बड़ा  वर्ग चाय जनजाति समुदाय के मतदाताओं का है, जिनकी संख्या तीन लाख से ऊपर है।