भारत ने 2023-24 वित्तीत वर्ष में रिकॉर्ड 21,083 करोड़ रुपए मूल्य के हथियारों एवं रक्षा उपकरणों का निर्यात किया जो देश के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। वर्ष 2022-23 के मुकाबले इसमें 32.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2014 में सत्ता में आने के बाद देश को रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई कदम उठाये। इसी का नतीजा है कि आज रक्षा के क्षेत्र में निर्यात में भारी वृद्धि हुई है। मोदी सरकार ने रक्षा के क्षेत्र में निजी कंपनियों को भी शामिल किया है। भारत ने दुनिया के जिन 85 देशों में हथियारों एवं रक्षा उपकरणों का निर्यात किया है, उसमें 100 कंपनियां शामिल हैं। निर्यात में लड़ाकू विमान, मिसाइलें एवं रॉकेट लांचर शामिल हैं। हालांकि अभी भी भारत रक्षा के क्षेत्र में निर्यात करने वाले देशों की सूची में 40वें स्थान पर है। वर्ष 2013-22 के बीच हथियारों की खरीद में 11 प्रतिशत की कमी आई। रक्षा मंत्रालय ने अगले वित्त वर्ष के लिए 35 हजार करोड़ रुपए मूल्य के हथियारों एवं रक्षा उपकरणों के निर्यात का लक्ष्य रखा है। वर्ष 2022 में भारत ने फिलिपींस के साथ सुपर सोनिक मिसाइल ब्रह्मोस का सौदा किया था। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान जिस तरह पश्चिमी देशों ने हथियारों की आपूर्ति को लेकर यूक्रेन के समक्ष नए-नए शर्त थोपे तथा समय से हथियारों की आपूर्ति नहीं की उससे भारत को बहुत कुछ सीखने को मौका मिला है। समय पर हथियार नहीं मिलने से कई बार यूक्रेन को रूस के सामने हार का सामना करना पड़ा है। चीन ने भारत के साथ गलवान में जैसा धोखा किया, उससे भी भारत को सीखने का मौका मिला है। चीन ने समझौते को तोड़ते हुए भारत पर हमला किया, जिसमें हमारे 20 जवान शहीद हो गए। भारतीय सेना ने भी चीन को करारा जवाब दिया जिसमें उनके 45 से ज्यादा जवान मारे गए। चीन की हरकत को देखते हुए मोदी सरकार ने यह निर्णय लिया कि अपनी सेना के तीनों अंगों को मजबूत करने की जरुरत है। चीन लगातार भारत के खिलाफ साजिश रच रहा है। चीन की नौसेना दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना है। अपनी नौसेना की ताकत पर चीन हिंद महासागर में भी दादागिरी करना चाहता है। भारत अपनी नौसेना को मजबूत करने के लिए प्रयासरत है। इसके साथ ही मोदी सरकार ने बाहरी देशों से हथियार खरीद में कमी लाने के लिए कदम उठाये हैं। युद्ध के समय अमरीका सहित पश्चिमी देश मनमाने दाम पर हथियार एवं रक्षा उपकरण बेचते हैं। यही कारण है कि भारत ने रक्षा क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए तेजी से काम करना शुरू कर दिया है। भारत अभी दक्षिण ग्लोबल साउथ का लीडर बन गया है। फिलहाल भारत हथियारों के निर्यात के क्षेत्र में छोटे देशों को अपनी सूची में शामिल कर रहा है।  हथियारों के निर्यात में म्यामां का हिस्सा 31 प्रतिशत, श्रीलंका का 19 प्रतिशत, मारिशस का 12 प्रतिशत रहा। भारत ने विकासशील देशों के केवल छोटे देशों को ही टारगेट किया है। अगर हथियारों के निर्यात पर गौर करें तो अमरीका, रूस, फ्रांस, चीन तथा जर्मनी की हिस्सेदारी 76 प्रतिशत है। ये देश हथियार निर्यात को हथियार बनाकर विकासशील देशों पर अपनी मनमानी करते रहते हैं। रक्षा के क्षेत्र में भारत की बढ़ती ताकत से पश्चिमी देश परेशान हैं, क्योंकि उनको लगता है कि भारत अब उनके शिकंजे से बाहर जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों से भारत की विदेश नीति पश्चिमी देशों को असहज कर रही है।