पूर्वांचल प्रहरी डेस्क संवाददाता गुवाहाटी, कोकराझाड़  : गुवाहाटी हाईकोर्ट ने कोकराझाड़ के सांसद नव शरणिया को राहत दी है। अदालत ने नव शरणिया के एसटी प्रमाणपत्र को खारिज करने के सरकार के निर्देश पर रोक लगा दी। उल्लेखनीय है कि नव शरणिया के जाति प्रमाण पत्र को लेकर गुवाहाटी हाईकोर्ट में मामला दायर किया गया था। हाई कोर्ट ने सरकार की ओर से जारी स्पीकिंग ऑर्डर को खारिज कर दिया। सांसद के चुनाव लडऩे पर रोक लगा दी गई थी लेकिन अदालत के निर्देश के बाद अब उनकी चुनाव लडऩे की बाधाएं दूर हो गई हैं। कोर्ट से राहत मिलने के बाद कोकराझाड़ के सांसद नव कुमार शरणिया ने बुधवार को दिसपुर प्रेस क्लब में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया।

उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कोर्ट को धन्यवाद दिया और कहा कि उन पर लगाए गए आरोप कि वह एसटी नहीं हैं, सच नहीं हैं। शरणिया लोग कछारी मूल के हैं और उन्होंने असमिया जाति के गठन का बीड़ा उठाया है। उन्होंने असम सरकार से शरणिया कछारियों के मुद्दे को हल करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नव शरणिया को चुनाव लड़ने से रोकने की साजिश नाकाम हो गई और कोर्ट के फैसले के बाद अब वह चुनाव लड़ सकेंगे।

आदिवासी जाति प्रमाण पत्र के मुद्दे पर कानूनी लड़ाई में फंसे 5वें कोकराझाड़ लोकसभा क्षेत्र के सांसद नव कुमार शरणिया को आखिरकार चुनाव लडऩे में जो बाधाएंं आई थीं वे अब दूर हो गई हैं। सांसद ने कहा कि वे कोकराझाड़ निर्वाचन क्षेत्र से फिर से चुनाव लड़ेंगे और तीसरी बार जीतेंगे। उन्होंने कहा कि साजिशें उन्हें चुनाव लडऩे से नहीं रोक सकतीं।

उन्होंने कहा कि वह भारी मतों से जीतेंगे। उन्होंने कहा कि जनता उनके साथ है और विपक्ष पहले भी उनके पीछे रहा है और इस बार भी उनके पीछे है। उन्होंने कहा कि वे इस बार कोकराझाड़ के साथ-साथ दरंग-उदालगुड़ी निर्वाचन क्षेत्र से भी चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें दरंग-उदालगुड़ी में भाजपा उम्मीदवार दिलीप सैकिया की चिंता नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि बीपीएफ के दुर्गादास बोड़ों भाग्यशाली विधायक हैं। उन्होंने कहा कि दुर्गादास बोरो का करियर पहले ही खत्म हो चुका है। उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि वह अब आदिवासी मुद्दे में न उलझें। उन्होंने यह भी कहा कि वे आदर्शगत कारणों से किसी भी पार्टी में शामिल नहीं होंगे।

दूसरी ओर  गौहाटी उच्च न्यायालय द्वारा आज बुधवार को कोकराझाड़ लोकसभा के सांसद नवकुमार शरणिया के जनजाति होने के मामले में शरणिया के पक्ष में फैसला सुनाए जाने पर अब्सू के अध्यक्ष दीपन बोड़ो ने खेद जताते हुए कहा कि नवकुमार शरणीया जनजाति नहीं, इसका फैसला तभी हो गया था जब जांच समिति ने उनके जनजाति होने के सर्टिफिकेट को रद्द करने की सिफारिशअदालत को सौंपी थी। इसके बावजूद अदालत द्वारा उनके पक्ष में फैसला सुनाए जाने को हम सही नहीं मानते हैं।

अदालत के निर्णय का हम विरोध नहीं कर रहे हैं। अगर नवकुमार शरणिया उक्त नकली सर्टिफिकेट से नामांकन पत्र दाखिल करते हैं तो उसका जवाब जनता उनको हराकर देगी। लोकसभा के बीपीएफ उम्मीदवार खम्फा बरग्यारी ने कहा कि अदालत ने जो फैसला दिया है इससे जनता का भरोसा टूटा है। हम जिला आयुक्त से निवेदन करेंगे कि वे नवकुमार शरणिया के नामांकन को स्वीकार ना करें। अगर उनके नामांकन को स्वीकार किया जाता है तो जनता उसका जवाब अवश्य देगी।