पूर्वांचल प्रहरी डेस्क संवाददाता गुवाहाटी : अपने पिता राजा दशरथ का वचन निभाते हुए रामचन्द्र माता कैकेयी की इच्छानुसार 14 वर्ष के लिए वनवास चले गए थे। भरत ने माता कैकेयी की इच्छानुसार राज्य का शासन तो संभाला, लेकिन उन्होंने खुद सिंहासन पर नहीं बैठा और राम की पादुका को राजगद्दी पर स्थापित करके उनकी ओर से देश पर शासन किया। हाल ही में जनता को सुशासन देने के लिए कृतसंकल्प भरत नरह ने पत्नी को वंचित करने पर पार्टी ही छोड़ दी। भरत नरह ने अपनी पत्नी रानी नरह को पार्टी से टिकट नहीं मिलने पर नाराज होकर कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया। गौरतलब है कि असम आंदोलन के परिणामस्वरूप असम गण परिषद का जन्म हुआ था।

असम आंदोलन के दौरान भरत नरह का भाषण सुनने के लिए हजारों लोग सड़कों पर उतर आए थे। वही भरत नरह बाद में एजीपी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए। दरअसल, भरत नरह के इस कृृत्य से ही एजीपी के बुरे दिनों की शुरुआत हुई थी। हाल ही में इस्तीफा देने वाले कांग्रेस विधायक भरत नरह के अपनी पत्नी रानी नरह के साथ भाजपा में शामिल होने की अफवाह है। भरत नरह के भाजपा में शामिल होने के संदर्भ में मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा ने कहा कि मुझे नहीं पता कि भरत नरह कहां जाएंगे लेकिन वे भाजपा के साथ किसी भी तरह के संपर्क में नहीं हैं।

जहां तक मेरी जानकारी है, उनके मोबाइल फोन बंद हैं। हालांकि सीएम ने कहा है कि भरत नरह भाजपा में शामिल नहीं हो रहे हैं। दूसरी ओर, उनके मोबाइल फोन बंद होने की बात से यह स्पष्ट हो गया है कि भरत नरह भाजपा नेतृत्व के संपर्क में हैं। गौरतलब है कि रानी नरह को वंचित करके उदय शंकर हजारिका को पार्टी का टिकट दे दिया गया था। इसके बाद भरत नरह ने 24 मार्च को असम प्रदेश कांग्रेस के मीडिया विभाग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने 25 मार्च को पार्टी से इस्तीफा देते हुए कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े को इस्तीफा पत्र भेज दिया है।