दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को आबकारी नीति मामले में गिरफ्तार किया गया है। इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उन्हें नौ समन जारी किए, लेकिन वह पेशी पर नहीं गए। बृहस्पतिवार को ईडी की टीम दसवां समन लेकर केजरीवाल के घर पहुंची और उन्हें गिरफ्तार कर लिया। आबकारी नीति मामले में इससे पहले आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह और मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार किया जा चुका है। अरविंद केजरीवाल कई बार सार्वजनिक रूप से कह चुके थे कि उन्हें गिरफ्तार करने की तैयारी की जा रही है। इस बारे में वह दिल्ली हाई कोर्ट भी गए जिसने बृहस्पतिवार को उन्हें ईडी की कार्रवाई से सुरक्षा देने से इनकार कर दिया था। हाई कोर्ट के आदेश के तुरंत बाद ईडी ने केजरीवाल को गिरफ्तार कर लिया। इससे पहले सीबीआई ने पिछले साल 26 फरवरी को दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को हिरासत में ले लिया था। बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। जिस आबकारी नीति के मामले में ये गिरफ्तारियां हुई हैं, उसे बतौर आबकारी मंत्री सिसोदिया ने ही नवंबर 2021 में लागू किया था, लेकिन एक साल पहले अगस्त 2022 में नीति को रद्द कर दिया गया। इन नौ महीनों में इस नीति के लागू करने में एक बड़े घोटाले का आरोप लगाया गया है।
विवादित आबकारी नीति 2021 के तहत आम आदमी पार्टी की सरकार ने राज्य सरकार को क्षेत्र में शराब की बिक्री के व्यापार से पूरी तरह बाहर निकालने की योजना बनाई थी। आम आदमी पार्टी के मुताबिक इस नीति का मकसद सरकार राजस्व बढ़ाने के अलावा शराब की काला बाजारी खत्म करना, विक्रेताओं के लिए लाइसेंस के नियमों को लचीला बनाना और उपभोक्ताओं के अनुभवों को बेहतर बनाना जैसे लक्ष्य लिए शराब खरीदने को एक बढिय़ा अनुभव बनाना था। नई नीति के तहत शराब की दुकानें सुबह तीन बजे तक खुली रखने और शराब की घर पर डिलीवरी करवाने जैसे नियम भी प्रस्तावित थे। साथ ही शराब विक्रेताओं को दामों में छूट देने की इजाजत भी दी गई थी। कुछ महीनों तक उपभोक्ताओं को शराब के दामों में भारी छूट भी मिली।
नतीजतन शराब दुकानों के बाहर लंबी कतारें देखी गईं। एक रिपोर्ट के अनुसार इससे दिल्ली सरकार के रेवन्यू में 27 फीसदी की वृद्धि हुई और राज्य ने लगभग 8,900 करोड़ रुपए कमाए। जुलाई 2022 में दिल्ली के मुख्य सचिव नरेश कुमार ने उपराज्यपाल वीके सक्सेना को नई आबकारी नीति पर एक रिपोर्ट पेश की जिसमें उन्होंने नीति में अनियमितताओं का दावा किया। इस रिपोर्ट में आरोप लगाए गए कि बतौर आबकारी मंत्री मनीष सिसोदिया ने शराब विक्रेताओं को लाइसेंस देने के बदले कमीशन और रिश्वत ली। नरेश कुमार ने रिपोर्ट में यह भी कहा कि लाइसेंस फीस और शराब की कीमतों में नियमों को ताक पर रखकर छूट दी गई, जिससे सरकार को करीब 144 करोड़ रुपयों का नुकसान हुआ।
यह भी दावा किया गया कि कमीशन और रिश्वत से मिली रकम का इस्तेमाल आम आदमी पार्टी ने फरवरी 2022 में हुए पंजाब विधानसभा चुनावों में किया। मुख्य सचिव ने दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा को भी अपनी रिपोर्ट सौंपी और इस मामले में जांच करने के लिए कहा। इसी रिपोर्ट के आधार पर उपराज्यपाल ने पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी। सीबीआई ने अगस्त 2022 में सिसोदिया समेत 15 लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया। आरोपियों में तत्कालीन एक्साइज कमिश्नर समेत तीन अफसर, दो कंपनियां और नौ कारोबारी शामिल थे। मनीष सिसोदिया के घर छापे मारे गए और कई बार पूछताछ के बाद 26 फरवरी 2023 को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
पहले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का सीधे तौर पर इस मामले में नाम नहीं था लेकिन एक हफ्ता पहले तेलंगाना के निजामाबाद से विधायक और के चंद्रशेखर रेड्डी की बेटी के. कविता को गिरफ्तार किया गया। कविता के अकाउंटेंट बुचीबाबू से भी इस मामले में पूछताछ की गई और उन्होंने ही केजरीवाल का नाम लिया। इससे पहले ईडी ने दिनेश अरोड़ा नाम के एक व्यक्ति को भी गिरफ्तार किया था। आरोप है कि अरोड़ा केजरीवाल से मिलते थे।