पूर्वांचल प्रहरी डेस्क संवाददाता गुवाहाटी : उद्योग या कारखाने नहीं, बल्कि वाहनों से निकलने वाले काले धुएं और कंक्रीट के बुनियादी ढांचे के निर्माण से निकलने वाली धूल के कारण गुवाहाटी ने दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में एक अवांछित रिकॉर्ड बनाया है। गुवाहाटी अब दुनिया का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर बन गया है। स्विस फर्म आईक्यू एयर के वार्षिक सर्वेक्षण में यह चिंताजनक निष्कर्ष सामने आया हैं। गुवाहाटी शहर में यातायात में हो रही अनियंत्रित वृद्धि, बड़ी इमारतों का निर्माण, फ्लाईओवरों के निर्माण और हरित आवरण के विनाश के परिणामस्वरूप यह खतरा पैदा हो रहा है निकट भविष्य में कि गुवाहाटी शहर रहने लायक नहीं रह जाएगा।    आईक्यू एयर की 2023 वैश्विक वायु गुणवत्ता रिपोर्ट के अनुसार बिहार का बेगुसराय दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर है। बेगुसराय शहर के वातावरण में तैरते कण 2.5 (पीएम 2.5) की औसत सांद्रता 118.9 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है। बेगुसराय के बाद गुवाहाटी में वायुमंडल में तैरते कणों का स्तर सबसे अधिक है। गुवाहाटी महानगरीय क्षेत्र के वातावरण में तैरते कण 2.5 (पीएम 2.5) की औसत सांद्रता 105.4 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है। गौरतलब है कि 2022 में गुवाहाटी में पार्टिकुलेट मैटर या पीएम 2.5 की मात्रा 51 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर थी। इसका मतलब है कि पिछले एक साल में गुवाहाटी के वातावरण में तैरते कणों की मात्रा 100 प्रतिशत बढ़ गई है। यह गुवाहाटी महानगरीय क्षेत्र के निवासियों के लिए यह बहुत खतरनाक संकेत है। स्विस एजेंसी आईक्यू एयर के अनुसार गुवाहाटी के बाद दिल्ली, मुल्लानपुर और लाहौर दुनिया के दूसरे सबसे प्रदूषित शहर हैं। सर्वेक्षण के मुताबिक दुनिया के 50 सबसे प्रदूषित शहरों में से 42 शहर भारत में हैं। हालांकि इसी सर्वेक्षण में वायु गुणवत्ता सूचकांक के आधार पर दिल्ली दुनिया के सबसे प्रदूषित राजधानी शहरों की सूची में शीर्ष पर है। गौरतलब है कि स्वीस संगठन ने दुनिया भर के 134 देशों के बीच एक सर्वेक्षण किया और 100 शहरों को प्रदूषित शहर के रूप में सूचीबद्ध किया है। चिंता की बात यह है कि दुनिया के 100 सबसे प्रदूषित शहरों में से 99 शहर एशिया में हैं। स्वाभाविक रूप से गुवाहाटी में तैरते कणों की सांद्रता 105.4 माइक्रोग्राम तक पहुंच गई है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन के ख़तरे सूचकांक से 10 गुना अधिक है। पर्यावरण वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगर गुवाहाटी में वायु प्रदूषण को नियंत्रण में नहीं लाया गया, तो नागरिक जल्द ही विभिन्न बीमारियों से पीड़ित होंगे। वायु प्रदूषण के परिणाम स्वरूप अस्थमा, कैंसर, स्ट्रोक और फेफड़ों की बीमारियों के साथ-साथ बच्चों के मानसिक विकास में व्यवधान का भी जोखिम पैदा हुआ है। इसी सर्वेक्षण में भारत दुनिया के सबसे प्रदूषित देशों की सूची में शीर्ष पर है। भारत के बाद बांग्लादेश और पाकिस्तान का स्थान है जो प्रति घन मीटर में पीएम 2.5 की अधिक सांद्रता अनुभव करते हंै। इसके अलावा 33 अरब लोग या 96 प्रतिशत भारतीय आबादी विश्व स्वास्थ्य संगठन के वार्षिक पीएम 2.5 दिशानिर्देशों से सात गुना अधिक पीएम 2.5 स्तर का अनुभव करती है। इसके अलावा, 1.33 बिलियन लोग या 96 प्रतिशत भारतीय आबादी विश्व स्वास्थ्य संगठन के वार्षिक पीएम 2.5 दिशा-निर्देशों से सात गुणा अधिक पीएम 2.5 स्तर का अनुभव करती है। शहरी स्तर के आंकड़ों में परिलक्षित होती है कि देश के 66 प्रतिशत से अधिक शहरों में वार्षिक औसत 35 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक है। स्विस संगठन आईक्यू एयर द्वारा विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट 2023 के अनुसार 134 देशों में से बांग्लादेश में 79.9 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर, पाकिस्तान में 73.7 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और भारत में औसत वार्षिक पीएम 2.5 की मात्रा 54.4 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था और इस हिसाब से भारत की वायु गुणवत्ता तीसरी सबसे खराब थी। इससे पहले 2022 में भारत आठवें सबसे प्रदूषित देश के रूप में स्थान पर था और औसत पीएम 2.5 की सांद्रता 53.3 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर थी। यह अनुमान लगाया गया है कि भारत के 1.36 बिलियन लोग विश्व स्वास्थ्य संगठन के के वार्षिक दिशानिर्देश का पीएम 2.5 का औसत स्तर 5 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर सांद्रता से कई गुना अधिक अनुभव करेंगे।